गर्मी के सितम के आगे ट्रेनों के जनरल कोच में सफर करने वाले यात्रियों का बुरा हाल है। भीड़ भाड़ वाले जनरल कोचों में इन दिनों यात्रियों का सफर मुश्किल हो चला है। ओवेन की तरह तप रहे इन कोचों में मजबूरी में यात्री सफर करने को बाध्य हैं। 90 सीट की क्षमता वाले इन कोचों में तकरीबन 200 यात्री इन दिनों ज्यादातर ट्रेनों में देखे जा सकते हैं। इन कोचों में न यात्रियों को पानी उपलब्ध है और न ही पंखे से मिलने वाली हवा। शायद इसी वजह से जनरल कोच में लू लगने एवं अन्य वजहों से पिछले एक माह में 10 यात्रियों के शव इलाहाबाद जंक्शन पर विभिन्न ट्रेनों से उतारे गए हैं।
इलाहाबाद जंक्शन से हर रोज 200 से ज्यादा ट्रेनों की आवाजाही है। राजधानी, दुरंतो, गरीब रथ एक्सप्रेस को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी ट्रेनों में जनरल कोच की सुविधा भी यात्रियों के लिए रहती है। लेकिन रूट चाहे दिल्ली का हो या फिर मुंबई का, चेन्नई का हो या फिर जम्मू का। सभी रूटों पर चलने वाली ट्रेनों के जनरल कोच में आम मुसाफिर शायद ही बैठने को तैयार हों, लेकिन कम किराया और टीटीई की धरपकड़ से बचने के लिए हर रोज इलाहाबाद से गुजरने वाली ट्रेनों में हजारों की संख्या में यात्री जनरल कोच में सफर करते हैं, लेकिन उन्हें सफर के दौरान जो परेशानी झेलनी पड़ती है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
मुंबई रूट की ट्रेनों के जनरल कोचों में इन दिनों यात्रियों की खासी भीड़ उमड़ रही है। काशी, कामायनी, मुंबई मेल, महानगरी, गोदान आदि ट्रेनों के जनरल कोच में भीड़ का आलम ये है कि उसके बाथरूम में बैठकर लोग सफर करने को मजबूर हैं। यही स्थिति दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस की है। इसके जनरल कोच में बैठने के लिए संगम एक्सप्रेस के रवाना होने के बाद ही लंबी लाइन लग जाती है।
‘यात्री सुविधा के लिए गर्मी की छुट्टियों में कई स्पेशल ट्रेन चलाई गई है। यात्री इन ट्रेनों का लाभ उठा सकते है। कुछ ट्रेनें ऐसी है जिसमें सिर्फ जनरल कोच ही लगे हुए हैं।’
- बिजय कुमार, सीपीआरओ, एनसीआर।