आधुनिकीकरण योजना के तहत यूपी के थानों में कंप्यूटर लगाए जाने के बावजूद अफसरों को शिकायत मिल रही है कि बहुत से थानों में अब भी एफआईआर हाथ से लिखी जा रही है। यह आलम तब है कि जबकि बिजली कटने पर कंप्यूटर चालू रखने के लिए थानों को बेहतर जेनरेटर और तेल के लिए पैसा मुहैया कराया गया है। डीजीपी ने इस बाबत आला अधिकारियो के साथ गोष्ठी के बाद आदेश जारी किया कि थानों में कंप्यूटर से एफआईआर लिखने में कोताही की गई तो जानकारी जुटाकर ऐसे थानेदारों के अलावा एसपी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के एडीजी डॉ.सूर्यकुमार शुक्ल ने बताया कि आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रदेश के 57 जनपदों के थानों में कंप्यूटर लगाकर सीसीटीएनएस योजना से जोड़ दिया गया है। इन 57 जिलों के थानों में अब एफआईआर कंप्यूटर के जरिए ही लिखी जा रही है। मगर अक्सर ये भी शिकायत मिलती है कि थानेदार या हेड मोहर्रिर की लापरवाही के चलते हाथ से एफआईआर लिखी जाती है। इसके पीछे बिजली गायब होने का भी बहाना नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि थानों को उच्च क्षमता के जेनरेटर उपलब्ध कराने के साथ ही सभी जिलों को एक-एक लाख रुपये तेल के लिए दिया गया है। इसी योजना के तहत सभी थानों के अपराधियों का रेकार्ड भी फोटो सहित ऑनलाइन किया जा रहा है ताकि प्रदेश के किसी दूसरे थाने की पुलिस को जरूरत हो तो फौरन जानकारी हासिल की जा सके। डीजीपी ने एडीजी पीएचक्यू सहित दूसरे अफसरों के साथ गोष्ठी में स्पष्ट किया कि जिन जिलों में कंप्यूटर से एफआईआर लिखने में उदासीनता बरती गई या अपराधियों का रेकार्ड ऑनलाइन नहीं किया गया तो उस जिले के एसपी के साथ ही थानेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। इस योजना का उद्देश्य अपराध नियंत्रण में तकनीक की मदद लेना है।