डिग्री अमान्य होने के कारण लगा झटका
पता चला है कि इसके लिए इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने वाले लिपिकों को पात्र माना गया था। लेकिन, तमाम लिपिकों ने राजस्थान के एक विश्वविद्यालय के अलावा कई निजी संस्थानों से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल कर लिया। फिर, इसी डिप्लोमा के आधार पर 122 लिपिकों को जेई बना दिया गया। जबकि, नियुक्ति से पहले डिप्लोमा का सक्षम संवैधानिक संस्था से सत्यापन करवाया जाना चाहिए था।
उन दिनों शिकायत के बाद जब इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राय मांगी गई, तब यूजीसी ने किसी भी दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से ली गई इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बाद ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) और डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) ने भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से लिए गए डिप्लोमा अमान्य करार दे दिया था, लेकिन इस मामले में कार्रवाई की बजाए पत्रावली ही दबा दी गई थी। अब नए सिरे से इस मामले की फाइल तलब किए जाने से जिम्मेदार अफसरों के होश उड़ गए हैं। कहा जा रहा है कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुकेहैं।