बुलंदशहर निवासी पुनीत सिंह के वकील ने दलील दी कि याची को 2019 में अनुकंपा के तहत नियुक्त किया गया था। उसे पहली बार गौतम बौद्ध नगर में तैनात किया गया था, जहां वह वर्ष 2022 तक रहा। 2022 में ही गौतम बौद्ध नगर से कासगंज, एटा में स्थानांतरित कर दिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पांच साल में पांचवां स्थानांतरण प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण लग रहा है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अगले आदेश तक अपर निदेशक (प्रशासन) उप्र, कृषि निदेशालय के 29 जून 2024 के आदेश पर रोक लगा दी है। कहा कि याची अपने कर्तव्यों का निर्वहन नियमित रूप से करेगा और उसका वेतन भुगतान जारी रहेगा। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने पुनीत सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया है।
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बुलंदशहर निवासी पुनीत सिंह के वकील ने दलील दी कि याची को 2019 में अनुकंपा के तहत नियुक्त किया गया था। उसे पहली बार गौतम बौद्ध नगर में तैनात किया गया था, जहां वह वर्ष 2022 तक रहा। 2022 में ही गौतम बौद्ध नगर से कासगंज, एटा में स्थानांतरित कर दिया गया। फिर उसे 2022 में कासगंज से मेरठ में स्थानांतरित कर दिया गया।
पुनः तीन सितंबर 2022 को याची को मेरठ से बुलंदशहर स्थानांतरित कर दिया गया। वहीं, 29 जून 2024 को याची का पांच साल की अवधि में पांचवां स्थानांतरण कर दिया गया। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। नोटिस जारी कर कोर्ट ने तीन सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है।