इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित नारी शक्ति महोत्सव में प्रदेश के राज्यपाल रामनाइक ने भ्रूण हत्या, बलात्कार, महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रोजाना अखबार में अपराध, उस पर भी महिला उत्पीड़न की भरमार होती है। इस स्थिति से संवेदनशीलता बढ़ाकर और इच्छाशक्ति से निपटा जा सकता है।
विश्वविद्यालय छात्रसंघ और संस्कारित युवा भारती, सांस्कृतिक युवा आदर्श समिति की ओर से आयोजित आदर्श युवती प्रतियोगिता की उद्धघोषणा के मौके पर राज्यपाल ने कहा कि महिला उत्पीड़न के लिए पुरुष ही नहीं महिलाएं भी जिम्मेदार हैं। बेटा ही चाहिए ऐसा विचार माता-पिता को निकालना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्वभाव से त्याग की प्रवृत्ति होती है। इसलिए वह हर क्षेत्र में सफल होने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि सुमित्रा महाजन ने संसद के हंगामेदार सत्र को बखूबी संचालित किया।
संसद सत्र का उदाहरण देते हुए राज्यपाल ने विपक्ष की भूमिका पर भी कटाक्ष किया। इस मौके पर उन्होंने संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्हाेंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में रखे जाने के बाद 1989 में एक संसदीय कमेटी गठित की गई थी, लेकिन 26 साल बाद भी वह बिल पास नहीं हुआ। राज्यपाल ने महिलाओं के सम्मान और उन्हें बराबरी का हक दिलाने का संकल्प दिलाया। कुलपति प्रोफेसर ए. सत्यनारायण ने महिलाओं को राजनीतिक और आर्थिक रूप से सशक्त करने की बात कही। इस कमजोरी को ही सभी तरह के उत्पीड़न का कारण बताया। उन्होंने महिला अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया तथा रूढ़ीवादी परंपराओं पर प्रश्नचिह्न लगाया।
विशिष्ट अतिथि नेहरू युवा केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. चंद्रशेखर प्राण ने कहा कि महिला उत्पीड़न संबंधों के संकट का परिणाम है। इसके लिए राजनीतिक और नीतिगत दोनों स्तर पर मंथन की जरूरत है। शिक्षक समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रो. जटाशंकर, प्रो. कृष्णा गुप्ता ने भी महिला उत्पीड़न पर चिंता जताई। संचालक प्रवीण विद्या अलंकार ने भी ओजस्वी तरीके से छात्राओं को उनकी ताकत का एहसास कराया। कार्यक्रम के दौरान सीनेट हाल न सिर्फ पूरी तरह से भरा था, बाहर भी बड़ी संख्या में छात्र खड़े रहे। आयोजन में श्याम प्रकाश पांडेय, शुभम गुप्ता, छात्रसंघ के संयुक्त मंत्री नवदिव्य मंगलम आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में राज्यपाल रामनाइक ने एक बार फिर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में आए राज्यपाल ने पत्रकारों को बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति से संबंधित फाइल नीतिसंगत नहीं थी। उसमें कई कमियां थीं। इसलिए बृहस्पतिवार को टिप्पणी के साथ वापस कर दिया। सरकारी स्कूलों में मंत्रियों, अफसरों, कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ाने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश पर राज्यपाल ने अपनी निजी टिप्पणी से इंकार किया। हां, इतना जरूर कहा कि सरकार को इसका अवलोकन कर पालन कराना चाहिए। बेबाक टिप्पणियों से सुर्खियों में रहने वाले राज्यपाल शुक्रवार को विवादित मुद्दों से बचते रहे। प्रदेश में कानून व्यवस्था, महिला उत्पीड़न जैसे सवालों पर उन्होंने किसी तरह की टिप्पणी से इंकार कर दिया।