इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने बिजली विभाग में बिना योग्यता के जूनियर इंजीनियरों को सहायक अभियंता बनाए जाने की योजना पर गहरी नाराजगी जताते हुए पूछा है कि बिना योग्यता के किस प्रकार से आठवीं पास टेकिभन शियन को पहले जूनियर इंजीनियर और फिर सहायक अभियंता बनाया जा रहा है। कोर्ट ने इस प्रोन्नति प्रक्रिया से संबंधित समस्त पत्रावलियां भी तबल कर ली हैं। मनीष कुमार सिंह और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति भारत भूषण की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तिथि नियत की है।
याची के वकीलों अनिल बिसेन और अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि उत्तर प्रदेश विद्युत राज्य निगम ने 27 फरवरी 2015 को कार्यालय ज्ञापन जारी कर गैर डिप्लोमाधारी जूनियर इंजीनियरों को दो माह का प्रशिक्षण देकर सहायक अभियंता बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। जबकि यह सभी गैर डिप्लोमाधारी जूनियर इंजीनियर पूर्व में तकनीकी सहायक ग्रेड वन और ग्रेड टू के पद पर थे। यह आठवीं पास हैं।
इनको विभागीय प्रोन्नति देकर पहले जूनियर इंजीनियर बनाया गया और अब मात्र दो माह का प्रशिक्षण देकर सहायक इंजीनियर बनाने की तैयारी है। अधिवक्ताओं की दलील थी कि इंडियन इलेक्ट्रिीसिटी रूल 1956 और बायलर आपरेशन इंजीनियरिंग रूल 2011 के अनुसार सहायक अभियंता वही हो सकता है जिसके पास इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हो। याचीगण डिप्लोमाधारी जूनियर इंजीनियर हैं। वह सहायक इंजीनियर होने की योग्यता रखते हैं मगर उनको नजरअंदाज कर गैर डिप्लोमाधारी लोगों को प्रोन्नति दी जा रही है। कोर्ट ने राज्य विद्युत निगम लिमिटेड से कार्यालय ज्ञापन सहित प्रोन्नति से संबंधित सभी रिकार्ड तलब कर लिए हैं।