इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में रहने का लाभ लेने के लिए फर्जी न्यायिक आदेश तैयार करने के आरोपी शिशुपाल को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता और मामले के उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई एक वर्ष में पूरी करने का भी निर्देश दिया है।
मामला झांसी के नवाबाद थाने में वर्ष 2010 में दर्ज मुकदमे से संबंधित है। आरोपी पर धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, कूटरचित दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। आरोपी 23 मार्च 2018 से जेल में बंद है। उसकी ओर से लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे में सहयोग करने के आधार पर जमानत की मांग की गई थी।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि आरोपी पूर्व में विस्फोटक पदार्थ से जुड़े अपराध व हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा, आपराधिक साजिश और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में दोषसिद्ध हो चुका है। आरोपी के खिलाफ 13 मामलों का आपराधिक इतिहास है।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के अवलोकन में पाया कि आरोपी ने 11 से 14 दिसंबर 2009 के दौरान झांसी जेल में रहने का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेज/आदेश तैयार किया था। कोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झांसी ने ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया था, क्योंकि संबंधित तारीख को वह अवकाश पर थे।