भगदड़ की स्थित पैदा की गई
आपके उक्त कृत्य से मौनी अमावस्या पर माघ मेला की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई। स्नान के लिए आ रहे लाखों स्नानार्थियों को सुरक्षित स्नान कराकर उन्हें वापस भेजने में दिक्कत हुई। मेला में आए जन मानस की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर खतरा भी उत्पन्न हुआ। इसके अलावा आप ने अपने आपको शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड आदि लगाए हैं। जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सर्वोच्च न्यायालय से रोक है, जो सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में है।
आपको सूचित किया जाता है कि 24 घंटे की भीतर यह स्पष्ट करें की आपके उक्त कृत्य के कारण आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो यह मानते हुए कि इस संबंध में आपको कुछ नहीं कहना है निर्णय पारित कर दिया जाएगा।
अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मेला प्रशासन को जारी किया है नोटिस
प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस भेजने के बाद शंकराचार्य की तरफ से भी मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है। जिसमें कहा गया है मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य लिखने पर नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की गई है। साथ ही इसे अपमानजनक बताया है। प्रशासन की ओर से 19 जनवरी को जारी नोटिस को वापस लेने की माग की गई है।
अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से जारी लीगल नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप शीर्ष अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है। साथ ही दंडनीय है। यदि प्रशासन 24 घंटे के भीतर अपना नोटिस वापस नहीं लेता है तो मानहानि और अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। आठ पेज के इस नोटिस को मेला प्राधिकरण के दफ्तर के बाहर चस्पा करने के साथ ही कार्यालय में भी रिसीव कराया गया है और ईमेल के माध्यम से भी मेला प्रशासन को भेजा गया है।
गृह सचिव, मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त और डीएम को ठहराया है जिम्मेदार
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बकायादा पोस्टर जारी कर गृह सचिव मोहित गुप्ता, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमा और जिलाधिकारी मनीष वर्मा को संगम स्नान से रोकने का आरोप लगाया है। साथ ही पुलिस पर बटुकों के साथ मारपीट करने उनकी चोटी और शिखा पकड़कर पटकने और लात घूंसों से मारने का आरोप लगाया। पुलिस अधिकारियों ने बटुकों से कहा कि क्यों गेरुआ वस्त्र पहनकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे को जाओ पढ़ लिखकर आगे बढ़ो। अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी हत्या की साजिश का भी आरोप लगाया था। कहा कि उन्हें पांच घंटे तक अगवा करके रखा गया। बाद में शाम को शिविर के सामने छोड़ दिया गया, तब से हम वहीं पर बैठे हैं।
मनकामेश्वर मंदिर को भी बनाया पक्षकार