ऑनलाइन शॉपिंग का सौदा रद्द होने के बाद शिपिंग कंपनी उपभोक्ता को भुगतान की गई राशि लौटाने को बाध्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इसे सेवा में कमी माना जाएगा। जिला उपभोक्ता फोरम ने ऐसे एक मामले में ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट को ग्राहक की रकम दस हजार रुपये जुर्माने तथा पांच हजार रुपये मुकदमे के खर्च सहित लौटाने का निर्देश दिया है। हंडिया के अभिषेक तिवारी ने कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया था। इस पर फोरम के अध्यक्ष जनार्दन सिंह और सदस्य अमिता गिरी ने सुनवाई की।
प्रकरण के अनुसार अभिषेक ने 15 अप्रैल 2014 को फ्लिपकार्ट कंपनी से नोकिया मोबाइल फोन 7899 रुपये में खरीदने के लिए आर्डर बुक किया। इसका भुगतान उसने अपने डेबिट कार्ड से कर दिया। अगले दिन अभिषेक ने अपना मोबाइल खरीद आर्डर निरस्त कर दिया। कंपनी द्वारा ई-मेल से बताया गया कि उसकी रकम एक मई 2015 को खाते में वापस कर दी गई है, मगर रकम खाते में वापस नहीं आई। कंपनी से कई बार मेल पर ही इस बाबत आश्वासन मिला कि रकम उसके खाते में शीघ्र वापस हो जाएगी, मगर वापस नहीं की गई। इससे क्षुब्ध होकर उसने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया।
कंपनी ने मोबाइल आर्डर निरस्त होने तथा भुगतान की बात स्वीकार की। साथ ही परिवाद की पोषणीयता पर भी सवाल उठाया। फोरम ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता को भुगतान न लौटाना सेवा में कमी है। परिवादी को मोबाइल की कीमत नौ प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ लौटाने तथा मानसिक क्षति के लिए दस हजार रुपये और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए पांच हजार रुपये दो माह के भीतर लौटाने का आदेश दिया है।