इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान साक्ष्य उपलब्ध हैं, अपराध की प्रकृति गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के तहत है तो गैंगस्टर एक्ट में की गई कार्रवाई सही है। आरोपी का नाम गैंगस्टर सूची में शामिल किया जा सकता है।
यह गैंगस्टर एक्ट नियम 21 के नियम 2022 के अनुसार है, जो कि नियम पांच, आठ और 10 के विपरीत व अपवाद स्वरूप है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने उस्मान व दो अन्य और मोहम्मद आजम की याचिका पर एक साथ सुनवाई कर खारिज करते हुए दिया है।
याचियों के खिलाफ मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान पहुंचाने, खान एंड खनिज अधिनियम सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई कर दी गई। याचियों ने पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती दी।