बेगम बाजार रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण में सेना की आपत्ति के बाद अब राज्य सरकार और वायु सेना के अफसर बीच का रास्ता तलाश रहे हैं। बताया जा रहा है कि सेना की आपत्ति का समाधान हो सकता है। इसके लिए हवाई पट्टी के दूसरे छोर का तकरीबन 500 मीटर विस्तार करना होगा। अगर ऐसा हो गया तो बम्हरौली में हवाई पट्टी की उपयोगिता प्रभावित नहीं होगी और आसानी से सभी तरह के विमानों की आवाजाही हो सकेगी।
वायुसेना का तर्क है कि भगवतपुर रेलवे क्रासिंग पर बन रहे रेल ओवर ब्रिज से उसकी हवाई पट्टी महज 500 मीटर की दूरी पर है। आरओबी की ऊंचाई विमान के उड़ान भरने तथा उतरने में बाधा उत्पन्न कर रही है। ऐसे में बम्हरौली में बन रहे नये सिविल एयरपोर्ट का भी कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। इस बीच चर्चा इस बात की चल रही है कि एयरपोर्ट के दूसरे छोर वाली हवाई पट्टी का 500 मीटर विस्तार कर दिया जाए तो हवाई यातायात आसानी से सुचारु किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में भी वायुसेना और जिला प्रशासन के अफसरों में मंत्रणा चल रही है। हालांकि अभी अंतिम रूप से कुछ भी तय नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अगर राज्य सरकार की ओर से पूर्व में आरओबी के लिए एनओसी मांगी जाती तो निश्चित ही सेना भगवतपुर क्रासिंग से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी पर ही आरओबी बनाने की अनुमति देती।
हालांकि सेना की आपत्ति पुल की ऊंचाई को लेकर है। जबकि संबंधित रेल क्रासिंग के पास ऐसे कई मकान है जिनकी ऊंचाई रेल ओवर ब्रिज से दोगुनी ज्यादा है। उधर भगवतपुर में भी जबसे वायु सेना के अफसरों ने आरओबी का काम रोका है तब से वहां रहने वाले स्थानीय लोग भी चिंतित है। दरअसल हावड़ा-दिल्ली रूट पर ट्रेनों की ज्यादा आवाजाही हो जाने की वजह से यहां फाटक दिन में कई बार बंद करना पड़ता है। कौशांबी जाने वाले लोग भी इसी फाटक का प्रयोग करते हैं। आरओबी बन जाने के बाद लोगों बार-बार फाटक के बंद होने की समस्या से भी निजात मिल जाती।
रेलवे, राज्य सरकार एवं वायुसेना के सक्षम अधिकारियों के बीच इस संबंध में अफसरों के बीच वार्ता चल रही है। जल्द ही इस मुद्दे का सकारात्मक हल निकलने की उम्मीद है।
00 गौरव कृष्ण बंसल, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे।