शोधकर्ताओं के मुताबिक, जबलपुर की तरह यह कतई नहीं माना जाना चाहिए कि यहां तीव्र भूकंपीय झटके नहीं आ सकते। हिमालय के टकराव जोन की तरह, मध्य भारत के ये भू-भाग भी भूकंपीय झटकों से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, प्राचीन विंध्य बेसिन में विभिन्न विकृत संरचनाएं और उनकी विशेषताएं भूकंप की आशंका को प्रबल बनाती हैं।
हाल के दिनों में यहां आए हल्के झटके यही संकेत देते हैं कि यहां की जमीन के भीतर कुछ ऐसी परतें हैं, जो किसी बड़े भूकंप का कारण बन सकतीं हैं। यह शोध विंध्य बेसिन के निरंतर विकास के क्रम में सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों को दर्शाता है, जो कि पहले की अवधारणा के उलट है। शोधकर्ताओं ने कहा कि भूकंप को राेका तो नहीं जा सकता, लेकिन सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके खतरे घटाए जा सकते हैं। वहां इमारतों का निर्माण भी मजबूती के साथ किया जाना चाहिए।