फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Research : चित्रकूट में मिले 140 करोड़ वर्ष पुराने भूकंप के प्रमाण, इलाहाबाद विवि के वैज्ञानिकों का दावा

Sat, 24 Jun 2023 02:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

शोध टीम के मुखिया प्रो. जयंत कुमार पति और उनके शोधार्थी अनुज कुमार सिंह (श्यामा प्रसाद मुखर्जी फेलो) का यह शोध पत्र प्रतिष्ठित एल्से वियर जर्नल (जर्नल ऑफ पेलियोजियोग्राफी) की वेबसाइट पर ऑनलाइन पब्लिश हो चुका है। जर्नल के आगामी जुलाई-2023 अंक में प्रकाशित भी होने जा रहा है।
विज्ञापन
चित्रकूट के विंध्य पर्वत पर मिले 140 करोड़ वर्ष पुराने भूकंप के प्रमाण। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट-सतना सीमांकन क्षेत्र में 140 करोड़ वर्ष पुराने तीव्र भूकंप के प्रमाण खोज निकाले हैं। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता पांच से अधिक होने का अनुमान है। इविवि के अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंसेज विभाग के प्रो. जयंत कुमार पति के मुताबिक मध्य भारत के इस इलाके को भूकंप से सुरक्षित माना जाता रहा है, लेकिन शोध में हनुमानधारा (विंध्य पर्वत) पर कई ऐसी विकृत संरचनाएं मिली हैं, जो भूकंप के बाद हुए भूमिगत परिवर्तनों को दर्शाती हैं।

विज्ञापन


शोध टीम के मुखिया प्रो. जयंत कुमार पति और उनके शोधार्थी अनुज कुमार सिंह (श्यामा प्रसाद मुखर्जी फेलो) का यह शोध पत्र प्रतिष्ठित एल्से वियर जर्नल (जर्नल ऑफ पेलियोजियोग्राफी) की वेबसाइट पर ऑनलाइन पब्लिश हो चुका है। जर्नल के आगामी जुलाई-2023 अंक में प्रकाशित भी होने जा रहा है।

यह बताता है कि भूकंपीय झटकों से सुरक्षित माने गए इस इलाके के भूमिगत परिवर्तनों का नए सिरे से अध्ययन किया जाना जरूरी है। चित्रकूट धाम से लगभग 3.5 किमी दूर विंध्यपर्वत पर मिलीं विकृत संरचनाओं का गठन भूकंपीय झटकों से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षणीय अस्थिरता, तरलीकरण और द्रवीकरण जैसी कई प्रक्रियाओं के संयोजन से हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जबलपुर की तरह यह कतई नहीं माना जाना चाहिए कि यहां तीव्र भूकंपीय झटके नहीं आ सकते। हिमालय के टकराव जोन की तरह, मध्य भारत के ये भू-भाग भी भूकंपीय झटकों से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, प्राचीन विंध्य बेसिन में विभिन्न विकृत संरचनाएं और उनकी विशेषताएं भूकंप की आशंका को प्रबल बनाती हैं।

हाल के दिनों में यहां आए हल्के झटके यही संकेत देते हैं कि यहां की जमीन के भीतर कुछ ऐसी परतें हैं, जो किसी बड़े भूकंप का कारण बन सकतीं हैं। यह शोध विंध्य बेसिन के निरंतर विकास के क्रम में सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों को दर्शाता है, जो कि पहले की अवधारणा के उलट है। शोधकर्ताओं ने कहा कि भूकंप को राेका तो नहीं जा सकता, लेकिन सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके खतरे घटाए जा सकते हैं। वहां इमारतों का निर्माण भी मजबूती के साथ किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें