मुंडेरा स्थित मंडी परिषद में 2.44 करोड़ के गबन के मामले की विवेचना पुलिस एक साल बाद भी पूरी नहीं कर सकी है। हाल यह है कि अब तक दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र करने की कार्रवाई ही पूरी नहीं हो पाई। घटना के चारों आरोपियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। उधर, विभागीय जांच के बाद मंडी परिषद की ओर से इस मामले में एक अधिकारी की सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा चुकी है। पिछले साल 16 सितंबर को निदेशक राज्य कृषि उत्पादन के आदेश पर सहायक उपनिदेशक कुलभूषण वर्मा की ओर से दर्ज कराए गए इस मामले में दो अफसरों समेत चार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
उन्होंने तहरीर में बताया था कि निदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से भेजे पत्र में निर्माण खंड मंडी परिषद प्रयागराज में 2,44,37,327 रुपये के गबन किए जाने की बात बताई गई। यह भी बताया गया कि विभागीय जांच में इसके लिए रवींद्र सिंह प्रभारी उपनिदेशक (निर्माण) मंडी परिषद प्रयागराज, संजीव कुमार गंगवार तत्कालीन लेखा एवं सम्परीक्षाधिकारी, मैकूलाल तत्कालीन लेखा एवं सम्परीक्षाधिकारी को उत्तरदायी ठहराया गया।
यही नहीं जांच के दौरान यह भी पाया गया कि निर्माण खंड में 12 जुलाई 2022 तक कार्यरत रहे वरिष्ठ सहायक मंजीत सिंह (वर्तमान तैनाती निर्माण खंड झांसी) ने गबन की रकम अपनी पत्नी व चार निकटतम संबंधियों के खाते में जमा कराई।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से लेकर अब तक इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। विवेचना का आलम यह है कि अभी दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र करने का काम ही पूरा नहीं हो सका है। इस मामले में एसीपी श्यामजीत प्रमिला सिंह का कहना है कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है। पता लगाया जाएगा कि विवेचना क्यों लंबित है।
दो के संंबंध में जांच जारी, एक का फंड रोका गया
पुलिस के उलट इस मामले में मंडी परिषद की ओर से कराई गई विभागीय जांच में एक अधिकारी की सेवा समाप्त की जा चुकी है। सहायक उपनिदेशक कुलभूषण वर्मा ने बताया कि प्रभारी उपनिदेशक (निर्माण) मंडी परिषद प्रयागराज रहे रवींद्र सिंह की सेवा समाप्त कर दी गई है। संजीव कुमार गंगवार तत्कालीन लेखा एवं सम्परीक्षाधिकारी और यहां पूर्व में कार्यरत रहे वरिष्ठ सहायक मंजीत सिंह (मुकदमा लिखे जाने के समय तैनाती निर्माण खंड झांसी) के खिलाफ जांच प्रचलित है। सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन लेखा एवं सम्परीक्षाधिकारी मैकूलाल का फंड आदि रोकने की कार्रवाई की गई है।