कुंभ-2019 में दंडीबाड़ा को हरिश्चंद्र मार्ग पर जमीन आवंटित हुई थी। पदाधिकारियों ने महाकुंभ में भी वहीं पर जमीन देने की मांग की। मेला प्रशासन की ओर से कहा गया कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उपलब्धता तथा परंपरा के तहत जमीन बांटी जाएगी।
दंडी स्वामी नगर में सभी संस्थाओं को एक समान जमीन मिलेगी। मेला प्रशासन के साथ शनिवार को हुई बैठक में पदाधिकारियों ने माघ मेला में शिविर लगा चुकीं संस्थाओं के नाम भी अभिलेख में शामिल करने की मांग की। उन्होंने सात नई संस्थाओं को भी जमीन और सुविधाएं देने को कहा। मेला क्षेत्र में तो अभी पानी भरा है लेकिन महाकुंभ के मद्देनजर बसावट की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में मेला प्रशासन की दंडीबाड़ा के सन्यासियों से वार्ता हुई। दंडीबाड़ा में अभी 173 संस्थाएं पंजीकृत हैं।
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इनके अलावा करीब 24 ऐसी संस्थाएं हैं जिनके कैंप माघ मेला में लगे लेकिन मेला प्रशासन के अभिलेख में उनके नाम दर्ज नहीं है। इनके अलावा सात अन्य नई संस्थाएं भी हैं। इस तरह से अब 212 संस्थाएं हो गई हैं। अब तक दंडीबाड़ा की संस्थाओं को 30 और 40 बीघे जमीन आवंटित होती रही है लेकिन इस बार सभी को एक समान 50 बीघे जमीन आवंटन तथा सुविधाओं की मांग की गई।
कुंभ-2019 में दंडीबाड़ा को हरिश्चंद्र मार्ग पर जमीन आवंटित हुई थी। पदाधिकारियों ने महाकुंभ में भी वहीं पर जमीन देने की मांग की। मेला प्रशासन की ओर से कहा गया कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उपलब्धता तथा परंपरा के तहत जमीन बांटी जाएगी। नवंबर के आखिरी या दिसंबर के पहले सप्ताह में सुविधाएं प्रदान कर दी जाएंगी। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि वार्ता सकारात्मक रही।
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मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि बैठक में महाकुंभ पर चर्चा हुई। उनके मांगपत्र लिए गए। परंपरा के तहत जमीन एवं सुविधाएं दी जाएंगी। इस दौरान अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमल देव, स्वामी आश्रम शास्त्री, स्वामी महेशाश्रम, महेंद्र स्वामी और अपर मेलाधिकारी दयानंद प्रसाद मौजूद रहे।