इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के हॉस्टलों में बिजली बिल के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन किया जा रहा है। मौजूद बिल में संशोधन के लिए विश्वविद्यालय के इंजीनियर से समीक्षा कराई जा रही है। संशोधित शुल्क में कूलर पर होने वाले बिजली खर्च को भी जोड़े जाने की तैयारी की है।
हॉस्टलों में सिंगल सीटेड बेड वाले कमरे में रहने वाले छात्र से आठ हजार रुपये और डबल सीटेड कमरे में रहने वाले छात्रों से सात हजार रुपये सालाना बिजली के मद में शुल्क लिया जाता है। इविवि प्रशासन ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली बिल के मद में जमा हुई धनराशि और खर्च हुई बिजली के एवज में जमा किए गए बिल की धनराशि का मिलान किया तो आंकड़े चौंकाने वाले रहे। हॉस्टलों से बिजली बिल के लिए निर्धारित शुल्क से जो धनराशि जमा प्राप्त हुई, वह खर्च की गई बिजली के बिल से काफी कम थी।
विश्वविद्यालय ने अपने स्तर से बिल तो जमा कर दिया लेकिन हॉस्टलों पर आंतरिक रूप से करोड़ों रुपये बकाया हो गया है। माना जा रहा है कि हॉस्टलों में प्रतिबंधित उपकरण हीटर और कूलर के उपयोग के कारण बिजली का बिल काफी अधिक आ रहा है, सो अब नए सिरे से इसकी समीक्षा की जा रही है और हॉस्टल में बिजली बिल के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन किए जाने की कवायद शुरू हो गई है। इसमें कूलर के बिजली खर्च को भी शामिल किए जाने की योजना है। डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने बताया कि जल्द ही बिजली के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन कर दिया जाएगा।