उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) की ओर से विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए 12 जनवरी को आयोजित लिखित परीक्षा की अनंतिम उत्तर कुंजी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विषयों के जानकारों का दावा है कि तकरीबन सभी विषयों के पेपर में गलत सवाल पूछे गए और सबसे अधिक गड़बड़ियां समाजशास्त्र के पेपर में हुईं।
समाजशास्त्र विषय में कई सवालों के उत्तर या तो गलत हैं या विकल्प में मौजूद ही नहीं हैं। प्रश्नपत्र में कुल 100 सवाल पूछे गए थे, जिनमें 30 सवाल सामान्य ज्ञान और बाकी के 70 प्रश्न विषय से संबंधित थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के अतिथि प्रवक्ता सतीश कुमार उपाध्याय ने सामान्य ज्ञान के चार और समाजशास्त्र के तकरीबन 10 सवालों को गलत ठहराया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भी इन सवालों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब यह देखना है कि आयोग जब अंतिम उत्तरकुंजी जारी करेगा तो उनमें से किसने सवालों में संशोधन करेगा।
इन सवालों पर हुईं आपत्तियां
सामान्य ज्ञान की बी-सिरीज में प्रश्न संख्या एक में पूछा गया है कि वर्ष 2016 की यूजीसी की कौन सी अधिसूचना गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान सुनिश्चित करने का प्रयास है। आयोग ने विकल्प ‘ए’ को सही माना है, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि सही विकल्प ‘बी’ है। विकल्प ‘ए’ में दिया है कि ‘पीएचडीपूर्ण करने की न्यूनतम एवं अधिकतम अवधि’ जबकि विकल्प ‘बी’ में है ‘पीएचडी कार्यक्रम लागू करने की 11 शर्तें पूरी करना’
- एक प्रश्न है कि किस वर्ष प्रार्थना समाज की स्थापना हुई। आयोग ने विकल्प ‘बी’ में दिए गए 1857 को सही माना है। अभ्यर्थियों का दावा है कि सही उत्तर 1867 विकल्प में मौजूद ही नहीं है।
-एक सवाल है कि विज्ञान एवं इजीनियरिंग के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए निम्न मेंसे किसे वर्ष 2016 में पद्म विभूषण दिया गया। आयोग ने विकल्प ‘ए’ में दिए गए नाम डॉ. वीए अत्रे को सही माना है जबकि अभ्यर्थियों को दावा है कि सही नाम डॉ. वीके अत्र विकल्प में मौजूद ही नहीं है।
- इसी तरह शोध प्रतिवेदन में परिसीमन से संबंधित पूछे गए सवाल में आयोग ने विकल्प ‘बी’ को सही माना है जबकि अभ्यर्थियों को दावा है कि सही जवाब विकल्प ‘डी’ है।
- समाजशास्त्र विषय में सवाल पूछा गया कि समाज एवं सामाजिक संरचना का प्रकार्यवादी दृष्टिकोण सबसे पहले किसने अभिव्यक्त किया? आयोग विकल्प ‘बी’ परमहंस को सही मानता है जबकि अभ्यर्थी विकल्प ‘डी’ स्पेंसर को सही बता रहे है।
- सवाल पूछा गया था कि प्रतीकात्मक अंत:क्रियावाद एक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य है जो निम्नलिखित में से किस पर बल देता है? अभ्यर्थियों को दावा है कि इसका सही उत्तर विकल्प ‘बी’ में दिए गए ‘व्यष्टि स्तर पर सामाजिक अन्योन्य क्रिया’ है, जबकि आयोग ने विकल्प ‘सी’ को सही माना है।
- सवाल है कि निम्नलिखित में कौन सा परेटो की तार्किक क्रिया पर लागू होता है्? अभ्यर्थियों का दावा है कि इस प्रश्न के जवाब के विकल्प के रूप में दिए गए उत्तरों को लेकर विवाद है और इस डिलीट होना चाहिए।
- सवाल पूछा गया कि विगत वर्ष भारत के मुख्य प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी के तहत कौन कौन सी मुख्य योजनाओं को शामिल किया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि सही जवाब 100 स्मार्ट सिटी, अमृत योजना, स्वच्छ भारत अभियान है जबकि आयोग ने किसी दूसरे विकल्प को सही माना है।
- सवाल है कि एससी दूबे ने विकास के सांस्कृतिक पहलू के विश्लेषण में किस अवधारणा पर प्रकाश डाला? आयोग ने विकल्प ‘सी’ में दिए गए ‘पारंपरिकता’ को सही माना है जबकि अभ्यर्थी दावा कर रहे हैं कि विकल्प ‘बी’ में दिया गया जवाब ‘नृजातीयता’ सही है।
- कुल प्रजनन दर से संबंधित पूछे गए सवाल में आयोग ने विकल्प ‘सी’ को सही माना जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि विकल्प परिभाषा के अनुसार फिट नहीं बैठता और इसे डिलीट किया जाना चाहिए।
- यह भी पूछा गया कि रिसर्च मेथड्स इन सोशल रिलेशंस पुस्तक निम्नलिखित में से किसने लिखी? आयोग ने विकल्प ‘बी’ में दिए गए नाम यंग को सही माना जबकि अभ्यर्थी विकल्प ‘ए’ में दिए गए नाम गुडे एवं हाट को सही मान रहे हैं।
- एक सवाल था कि लोगों अथवा समूहों की गतिविधि का निम्न से उच्चतरर पर पहुंचना निम्न में से क्या है? आयोग ने विकल्प ‘ए’ अनुलंबन गतिशीलता को सही माना है जबकि अभ्यर्थी विकल्प ‘डी’ उन्नतशीलता को सही उत्तर मान रहे हैं।