पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार 36 दिन तक चले कार्य बहिष्कार के बाद आखिरकार मंगलवार को बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा। इससे पहले बिजली आपूर्ति ठप होने के लिए कई जेई-एसडीओ को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशासन ने सूची बनाकर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन वह अड़े रहे। मंगलवार को हड़ताली कर्मचारियों के साथ आफीसर्स एसोसिएशन भी आ गया। संयुक्त संघर्ष समिति ने चेताया कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं होगा, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।
ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा के साथ निजीकरण वापसी पर सहमति के बाद समझौैता पत्र पर चेयरमैन की ओर से हस्ताक्षर न किए जाने से मंगलवार को आंदोलन और उग्र हो गया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जार्ज टाउन में मुख्य अभियंता पारेषण के दफ्तर परिसर में सुबह से ही विरोध सभा शुरू कर दी। वहां संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन को चेताया कि अगर निजीकरण के जन विरोधी प्रस्ताव को वापस लिए बगैर उनकेशांति पूर्ण आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गई, तो अधिकारी,कर्मचारी एक साथ जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे।
विरोध सभा में अविनाश पटेल, प्रदीप गुप्ता, जवाहर लाल विश्वकर्मा, आशीष सिंह, बृजेश पांडेय, अजीत पटेल, बहादुर सिंह, अनिल कुमार सिंह, इंद्रेश यादव, राकेश कुमार, प्रकाश यादव, प्रकाश यादव, राजीव मिश्रा, प्रशांत रघुवंशी, जेपी यादव, फूलचंद, राहुल यादव, राज कुमार, आलोक सिंह, शरद श्रीवास्तव, बालेश तिवारी, अमर दीप सागर, हर्ष गुप्ता, चंद्रशेखर आजाद समेत दो हजार से अधिक बिजली कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।