प्रदेश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं में पेपर वायरल होने के बाद सरकार के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है कि पेपर लीक की घटनाओं को कैसे रोका जाए। नए आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को भी इसी चुनौती का सामना करना होगा। उच्च शिक्षा निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद शासन नए आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।
यही वजह है कि आवेदनों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति में वक्त लग रहा है। नए आयोग के माध्यम से बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। यूपीटीईटी का आयोजन भी नया आयोग ही कराएगा। ऐसे में अन्य भर्ती संस्थानाें के मुकाबले नए आयोग के पास ज्यादा काम होगा।
अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव से पहले नए आयोग का गठन कर दिया जाएगा और आयोग कुछ नई भर्तियों की घोषणा भी कर देगा लेकिन अब यह मुश्किल लग रहा है। चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में नए आयोग के गठन की प्रक्रिया भी अटक जाएगी और अभ्यर्थियों को लंबित भर्ती परीक्षाओं के लिए चुनाव खत्म होने का इंतजार करना होगा।