अवैध गोदाम के किराये से मिली रकम से खरीदी गई प्रॉपर्टी
मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के दौरान ईडी को कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। पता चला है कि मऊ व गाजीपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा करके अवैध गोदाम बनवाए गए। यह दोनों गोदाम विकास कंसट्रक्शन के नाम पर बनवाए गए, जिसका कार्यालय रजदेपुर देहाती, गाजीपुर में स्थित था। इस कंपनी के पांच पार्टनर हैं, जिनमें मुख्तार की पत्नी अफ्शा अंसारी व उसकी पत्नी के भाई अनवर शहजाद व आतिफ रजा के अलावा योगेंद्र नारायण सिंह व जाकिर हुसैन शामिल हैं। खास बात यह कि मऊ में बनवाए गए गोदाम को एफसीआई को किराये पर देकर करीब 15 करोड़ रुपये कमाए गए। इस रकम से ही अलग-अलग जगहों पर मुख्तार के परिजनों के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदी गई। इनमें से ही दो प्रॉपर्टी बुंदेलखंड व जालौन की भी हैं।
बैंककर्मी को भी बुलाया, दिखाया रिकॉर्ड
पूछताछ के दौरान एक और खास बात यह रही कि ईडी दफ्तर में एक बैंककर्मी को भी बुलाया गया। सूत्रों का कहना है कि खातों से जुड़ी जानकारी के कई सवालों पर अब्बास ने अनभिज्ञता जताई। इस पर ईडी अफसरों की ओर से ही बैंककर्मी को बुलाया गया। बैंककर्मी की मदद से खातों में हुए ट्रांजक्शन के बारे में जानकारी मांगी गई। जिस पर उसकी बोलती बंद हो गई।
बताइए, विकास कंसट्रक्शन से क्यों मिले रुपये?
सूत्रों का यह भी कहना है कि ईडी की टीम ने अब्बास से विकास कंसट्रक्शन के बारे में भी पूछताछ की। इससे जुड़े पहले सवाल पर अब्बास ने यह तो स्वीकार किया कि यह कंपनी उसकी मां व दो मामा के नाम पर है। लेकिन उसने फर्म से अपना कोई संबंध होने की बात से इंकार कर दिया। हालांकि जब ईडी ने उससे पूछा कि फर्म के खाते से उसके खाते में रुपयों का लेनदेन क्यों हुआ तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।