तक्षकेश्वर महादेव के दर्शन के बिना प्रयागराज की यात्रा अधूरी
प्रयागराज। अगर तक्षकेश्वर नाथ के दरबार में आपने हाजिरी नहीं लगाई तो तीर्थराज प्रयागराज की यात्रा और यहां के तीर्थों के दर्शन-पूजन का आपको फल नहीं मिल सकता। इसलिए यज्ञ भूमि पर तक्षकेश्वर का अभिषेक-पूजन अवश्य करना चाहिए।
यमुना किनारे दरियाबाद में स्थित तक्षकेश्वरनाथ की महिला वेद-पुराणों ने भी गाई है। पद्मपुराण में तक्षक तीर्थ का वर्णन है। मान्यता है कि यहां शिव धाम के दर्शन और पूजन से कई दोषों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सावन में नागों के स्वामी तक्षक नाग के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि रुद्रलोक के नागों के प्रमुख तक्षक की सावन मास में विधि पूर्वक उपासना करने से सभी दोषों और बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।
तक्षकेश्वर नाथ मंदिर के पास यमुना नदी में तक्षकेश्वर कुंड भी है। पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण ने जब मथुरा से तक्षक नाग को खदेड़ा था, तब इसी कुंड में आकर उसने शरण ली थी। कहा जाता है कि सतयुग के शेषनाग, त्रेता के अनंतनाग, द्वापर में नागवासुकि और कलयुग में तक्षक नाग ही संकटों से पार लगाने वाले हैं।
कालसर्प दोष के निवारण के लिए किसी भी मास की शुक्लपक्ष की पंचमी के अलावा सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण या फिर विशेष तिथियों पर इस धाम में लोग आते हैं। माना जाता है कि इस तीर्थ की परिक्रमा और तक्षकेश्वर नाथ के दर्शन मात्र से राहु की महादशा, नागदोष एवं विषबाधा से मुक्ति मिल जाती है। - रविशंकर महाराज, पुजारी