मंडल के सबसे बड़े एमएलएन मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल, जिला महिला चिकित्सालय के साथ निजी अस्पतालों की ओपीडी में ऐसी महिला मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। चिकित्सकों के मुताबिक सौ में दस से 12 महिलाएं मोटापा बढ़ने की शिकायत लेकर आ रही हैं। अधिकतर को मोटापा बढ़ने के बाद अन्य बीमारियां घेर रही हैं। कुछ महिलाओं में थायराइड और मासिक धर्म के असंतुलन की पुष्टि हो रही है तो कुछ में डिप्रेशन, हाई बीपी, शुगर लेवल का बढ़ना और जोड़ों में दर्द की अधिकता पाई जा रही है।
मोटाबोलिक सिंड्रोम साधने की जरूरत
मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शक्ति जैन महिलाओं में मोटापे की समस्या को गंभीर बतातीं हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में ऐसे मरीज आ रहे हैं। परेशानी दूसरी है कि मोटापे के साथ अन्य गंभीर बीमारियों की पुष्टि ज्यादा कष्टकारी है। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान पाया गया कि कोरोना काल में अनियमित दिनचर्या, ओवर ईटिंग, वर्क आउट का छोड़ना अब भारी पड़ रहा है। ऐसी महिलाओं का वजन दस से 15 किलो बढ़ गया है। साथ में गंभीर बीमारियां, हार्मोनल डिस्बैलेंस बॉडी रेग्यूलेटरी को बिगाड़ने को तैयार है।
हार्मोंस मोटापा ही नहीं अन्य बीमारियों का कारण
स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मेहा अग्रवाल के मुताबिक सही है कि कोरोना काल में महिलाओं की दुश्वारियां बढ़ी हैं। हार्मोंस असंतुलित होने से मोटापा ही नहीं अन्य बीमारियां घेर रहीं हैं। शरीर का मोटाबॉलिज्म डिस्टर्ब हो रहा। डॉ. मेहा बताती हैं कि ओपीडी में आने वाली कम से कम दस फीसदी महिलाएं मोटापे से पीड़ित हैं। सभी का वजन बीते 16 से 18 महीनों में बढ़ा है। जांच में पाया जा रहा है कि हार्मोनल इनबैलेंस की वजह से मीनोपॉज, डिप्रेशन, शरीर में रक्त शर्करा का बढ़ना, थायराइड, जोड़ों में दर्द, हाई बीपी जैसी बीमारियां घेर रही हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में सामने आया है कि मोटापे के साथ महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों की आंखें भी कमजोर हो गई हैं। लगातार कई घंटे टीवी या मोबाइल देखने और लैपटॉप पर काम करने के साइड इफेक्ट मोटापे का कारण बन रहे हैं।