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Bhagat Singh: फिरंगियों को चकमा देने के लिए भगत सिंह की पत्नी बन गई थीं दुर्गा भाभी, जमानत के लिए बेच दिए गहने

Sat, 28 Sep 2024 01:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

28 सितंबर, 1907 को फैसलाबाद जिले के जरांवाला तहसील स्थित बंगा गांव (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह के पूर्वज महाराजा रणजीत सिंह की सेना में थे। बचपन से ही भगत सिंह में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गुस्सा था, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बनकर उन्होंने देश की आजादी के लिए क्रांति का रास्ता चुना था।
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दुर्गा भाभी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इंकलाब जिंदाबाद... जंग-ए-आजादी में यह नारा बुलंद कर युवाओं में जोश भरने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती आज मनाई जाएगी। कौशाम्बी का जिक्र किए बिना जंग-ए-आजादी में भगत सिंह का योगदान अधूरा रह जाता है। दरअसल, भगत सिंह ने फिरंगियों को चकमा देने के लिए कौशाम्बी जिले के शहजादपुर की क्रांतिकारी दुर्गा भाभी का सहयोग लिया था। दुर्गा भाभी लाहौर से कोलकाता जाते समय भगत सिंह की पत्नी बनी थीं और उन्हें अंग्रेज सेना के सिपाहियों से बचाया था।

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28 सितंबर, 1907 को फैसलाबाद जिले के जरांवाला तहसील स्थित बंगा गांव (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह के पूर्वज महाराजा रणजीत सिंह की सेना में थे। बचपन से ही भगत सिंह में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गुस्सा था, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बनकर उन्होंने देश की आजादी के लिए क्रांति का रास्ता चुना था। महज 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए लड़ते हुए 23 मार्च 1931 को अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

अमर शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह का कौशाम्बी तो आना नहीं हुआ, लेकिन यहां के शहजादपुर की दुर्गा भाभी से इनका गहरा नाता जरूर रहा है। दुर्गा भाभी ने कदम-कदम पर भगत सिंह समेत आजादी के मतवालों का साथ दिया। वह इनकी प्रमुख सहयोगी रहीं। लाला लाजपत राय की मौत के बाद क्रांतिकारियों ने सांडर्स को इसका दोषी माना और सजा देने की योजना बनाई।

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भगत सिंह इसके लिए आगे आए और पूरी योजना बना डाली। दुर्गा भाभी इसी समय सांडर्स और स्काॅर्ट से बदला लेने संकल्पित थीं। उन्होंने भगत सिंह व उनके साथियों को टीका लगाकर रवाना किया था। इस हत्या के बाद अंग्रेज भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों के पीछे पड़ गए थे।

तब भगत सिंह को बचाने के लिए दुर्गा भाभी आगे आई थीं। उनके भतीजे उदय शंकर भट्ट के बेटे अमित भट्ट ने बताया कि दुर्गा भाभी ने भेष बदलकर भगत सिंह के साथ लाहौर शहर छोड़ दिया था। इतना ही नहीं, वर्ष 1929 में जब भगत सिंह ने विधानसभा में बम फेंकने के बाद आत्मसमर्पण किया तो दुर्गा भाभी ने लॉर्ड हैली की हत्या की योजना बनाई। इसमें उनको सफलता नहीं मिली। इसके बाद दुर्गा भाभी ने भगत सिंह समेत राजगुरु व सुखदेव को बचाने के लिए जमानत का प्रयास किया और अपने गहने तक बेच दिए थे।

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पहली बार त्यागा था भारतीय गणवेश

दुर्गा भाभी व भगत सिंह वैसे तो हमेशा भारतीय गणवेश में रहते थे, लेकिन लाहौर से कोलकाता जाते समय ट्रेन में दुर्गा भाभी भगत सिंह की पत्नी बन गई थीं। वहीं, भगत सिंह एक अंग्रेज अफसर बने थे। अमित भट्ट ने बताया कि भगत सिंह को अंग्रेजों से बचाने के लिए दुर्गा भाभी ने पहली बार अपने पारंपरिक वेशभूषा को छोड़ा था।

सिर्फ 10 लाठी खाकर एक दिन जेल में बिताने वाले हो रहे सम्मानित

अमित भट्ट का कहना है कि दुर्गा भाभी के परिवार से होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है। सरकार केवल उनका ही ध्यान दे रही है, जिन्होंने 10 लाठी खाकर महज एक दिन जेल में बिताया था। वहीं, जिन्होंने पूरा जीवन आजादी के लिए समर्पित कर दिया, उनके परिवार की कोई मदद नहीं की जा रही है। जबकि, इतिहास की किताबें दुर्गा भाभी के नाम से भरी हैं।
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