भगत सिंह इसके लिए आगे आए और पूरी योजना बना डाली। दुर्गा भाभी इसी समय सांडर्स और स्काॅर्ट से बदला लेने संकल्पित थीं। उन्होंने भगत सिंह व उनके साथियों को टीका लगाकर रवाना किया था। इस हत्या के बाद अंग्रेज भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों के पीछे पड़ गए थे।
तब भगत सिंह को बचाने के लिए दुर्गा भाभी आगे आई थीं। उनके भतीजे उदय शंकर भट्ट के बेटे अमित भट्ट ने बताया कि दुर्गा भाभी ने भेष बदलकर भगत सिंह के साथ लाहौर शहर छोड़ दिया था। इतना ही नहीं, वर्ष 1929 में जब भगत सिंह ने विधानसभा में बम फेंकने के बाद आत्मसमर्पण किया तो दुर्गा भाभी ने लॉर्ड हैली की हत्या की योजना बनाई। इसमें उनको सफलता नहीं मिली। इसके बाद दुर्गा भाभी ने भगत सिंह समेत राजगुरु व सुखदेव को बचाने के लिए जमानत का प्रयास किया और अपने गहने तक बेच दिए थे।
पहली बार त्यागा था भारतीय गणवेश
दुर्गा भाभी व भगत सिंह वैसे तो हमेशा भारतीय गणवेश में रहते थे, लेकिन लाहौर से कोलकाता जाते समय ट्रेन में दुर्गा भाभी भगत सिंह की पत्नी बन गई थीं। वहीं, भगत सिंह एक अंग्रेज अफसर बने थे। अमित भट्ट ने बताया कि भगत सिंह को अंग्रेजों से बचाने के लिए दुर्गा भाभी ने पहली बार अपने पारंपरिक वेशभूषा को छोड़ा था।
सिर्फ 10 लाठी खाकर एक दिन जेल में बिताने वाले हो रहे सम्मानित
अमित भट्ट का कहना है कि दुर्गा भाभी के परिवार से होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है। सरकार केवल उनका ही ध्यान दे रही है, जिन्होंने 10 लाठी खाकर महज एक दिन जेल में बिताया था। वहीं, जिन्होंने पूरा जीवन आजादी के लिए समर्पित कर दिया, उनके परिवार की कोई मदद नहीं की जा रही है। जबकि, इतिहास की किताबें दुर्गा भाभी के नाम से भरी हैं।