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कापियों में ही हैं नकल के बड़े सुबूत

Mon, 04 Apr 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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यूपी बोर्ड मूल्यांकन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा में नकलमाफिया ने क्या तरीके अपनाए, किस बड़े पैमाने पर नकल हुई, यह जानने के लिए किसी वीडियोग्राफी की जरूरत नहीं। इलाहाबाद में परीक्षण के लिए आईं पूर्वांचल के कई जिलों की कापियां देखकर ही समझा जा सकता है कि बड़े पैमाने पर सामूहिक नकल हुई है। पहले दिन जिन परीक्षकों ने कुछ कापियां देखीं, नकल का तरीका देख हैरान हैं। परीक्षकों के मुताबिक कई केंद्रों की कापियों में ऐसा देखा गया कि एक परीक्षार्थी का जो सवाल गलत है, वही गलती दूसरों ने भी की है। साइंस में एक ने परिभाषा गलत लिखी तो दूसरों ने भी शब्दश: वही लिखा है। शब्दों की गलतियां भी एक सी हैं। साफ है कि जवाब बोलकर लिखाए गए हैं।
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बोर्ड की ओर से 30 मार्च से शुरू हुए मूल्यांकन के पहले दिन कुछ परीक्षा केंद्रों पर जो उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षकों के सामने आईं उसमें बड़ी संख्या में कापियां आपस में मिलती-जुलती दिखाई पड़ीं। इन कापियों में नकल करने में एक ही तरीका अपनाया गया गया है। जीजीआईसी में सामाजिक विज्ञान की कापियों में परीक्षार्थियों ने प्रश्नों को क्रम से हल किया है, उनके उत्तर भी एक जैसे हैं। मूल्यांकन में लगे एक परीक्षक ने इस बात की शिकायत अपने डीएचई से की।
ऐंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में हाईस्कूल विज्ञान की कापियों के मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों ने एक ही परिभाषा लिखी है, एक परीक्षार्थी ने इसे लिखने में गलती की है तो लगभग सभी परीक्षार्थियों ने वही गलती दोहराई है। पूरे सीरीज की कॉपी में यदि किसी परीक्षार्थी ने एक प्रश्न का उत्तर नहीं लिखा है तो उस प्रश्न का उत्तर सभी परीक्षार्थियाें ने नहीं लिखा है। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने कॉपी खाली छोड़ दी है। मूल्यांकन के दौरान विज्ञान के एक परीक्षक ने जो परिभाषा में गलती पकड़ी वही गलती हर परीक्षार्थी ने की है। छात्रों की ओर से नकल की पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी परीक्षक अंक काटने और फेल करने से परहेज कर रहे हैं। मूल्यांकन के दौरान परीक्षकों ने सीएवी इंटर कॉलेज, केसर विद्यापीठ और केपी इंटर कॉलेज में इस प्रकार की शिकायत दर्ज कराई है।
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 हाईस्कूल विज्ञान की कापियों केमूल्यांकन में भौतिकी का हिस्सा जांचने के लिए तो परीक्षक आसानी से मिल रहे हैं, परंतु जीव विज्ञान एवं रसायन विज्ञान का हिस्सा जांचने के लिए परीक्षक नहीं मिल रहे हैं। जीव विज्ञान एवं रसायन विज्ञान के परीक्षकों की कमी से कॉपी जांचने में परेशानी हो रही है।

 हाईस्कूल विज्ञान की कापियों का मूल्यांकन परीक्षकों की कमी के कारण प्रभावित हो रहा है। इससे मूल्यांकन प्रभारियों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के एक परीक्षा केंद्र पर पहली बार कॉपी मूल्यांकन के लिए पहुंची वित्तविहीन विद्यालय की एक शिक्षिका को परीक्षक नहीं बल्कि डीएचई (डिप्टी हेड एक्जामिनर) की जिम्मेदारी दे दी गई। इस परीक्षक के ग्रुप में नियुक्त डीएचई के मूल्यांकन के लिए नहीं आने तथा उस ग्रुप में गिनती के तीन शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए पहुंचने पर उन लोगों ने आपस में डीएचई चुन लिया।

शहर के आठ मूल्यांकन केंद्रों पर रविवार को सात पर ही मूल्यांकन कार्य हुआ। भारत स्काउट गाइड इंटर कॉलेज केंद्र पर प्रतियोगी परीक्षा का केंद्र होने के कारण मूल्यांकन बाधित रहा। मूल्यांकन के पांचवें दिन कुल एक लाख पचास हजार 592 कापियों का मूल्यांकन हुआ। इसमें केपी इंटर कॉलेज में 42566, जीआईसी में 40 हजार, सीएवी में 26620, जीजीआईसी में 3826, केसर विद्यापीठ में  12163, अग्रसेन इंटर कॉलेज में 17550, ऐंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में 7874 कापियों का मूल्यांकन हुआ।
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