सांस्कृतिक केंद्र में रविवार को मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बेटों वाली विधवा’ का मंचन सुबोध सिंह के निर्देशन में किया गया। नाटक में वृद्धावस्था के दर्द को बखूबी बयां किया गया। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह एक मां अपने बेटों और बहुओं के प्यार को तरसती है। जिन बच्चों को उसने चलना सिखाया, समाज की ऊंच-नीच, अच्छी बातें सिखाई, वृद्धावस्था में विधवा की स्थिति में बोझ बन जाती है। चार बेटों के होते हुए भी विधवा मां अपने घर के कोने में असहाय स्थिति में आंसू बहा रही होती है।
नाटक में पूजा ठाकुर, डॉ. राजन समदरिया, नीरज त्रिपाठी, अनुज कुमार, आशीष पाल, प्रिया सिंह, अंजलि, राजकुमार सागर, सुशील कुमार, नीलम, शिवानंद शास्त्री, कमल मिश्रा, हर्ष गुप्ता, रवि शाह के अभिनय को खूब सराहा गया। नाट्य रूपांतरण पंकज पांडेय ने किया। प्रस्तुति नियंत्रक ऋषभ यादव-अमित आर्या, मंच निर्माण रतीभान सिंह-सत्यम उपाध्याय, वस्त्र विन्यास इंद्रजीत-अजस सेन का रहा।