इलाज न मिलने से प्रतापगढ़ से यहां आए एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई। न्यूरो फिजीशियन ने लकवा ग्रस्त युवक को पार्क रोड स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया लेकिन उसे देखने नहीं आए। हालत गंभीर होने पर युवक को सोमवार देर रात पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। रास्ते में उनकी जान चली गई। युवक के परिजनों ने न्यूरो फिजीशियन और नर्सिंग होम प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इस संबंध में सीएमओ से भी शिकायत की गई है।
माता पिता का इललौता था बेटा, आठ दिसंबर को तय थी शादी
प्रतापगढ़ के लालगंज अझारा निवासी राजू तिवारी का इकलौता बेटा धीरज तिवारी (24) था। वह रेलवे में नौकरी की औपचारिकताएं पूरी कर रहा था। आठ दिसंबर को उसकी शादी तय थी। पिता राजू तिवारी ने बताया कि रविवार रात बेटे धीरज को लकवे की शिकायत हुई। स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर दरभंगा चौराहे स्थित न्यूरो विशेषज्ञ की क्लीनिक पर ले गए। वहां डॉक्टर ने मरीज नहीं देखा। उनके सहायक ने बताया कि पन्ना लाल रोड स्थित नर्सिंग होम में भर्ती करा दो। पिता आरोप लगाया कि नर्सिंग होम में भर्ती धीरज की डॉक्टर ने कई जांचें कराईं लेकिन देखने नहीं आए। सुबह से रात हो गई। वह कुछ लोगों के साथ उनके आवास पर गए लेकिन वह नहीं मिले।
इंजेक्शन लगाने पर बिगड़ी हालत, पीजीआई किया रेफर
धीरज के पिता राजू तिवारी का आरोप है कि दिन भर भर्ती धीरज को सिर्फ डिप चढ़ाई गई। रात करीब 12.30 बजे एक इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। जूनियर डॉक्टरों ने उसे पीजीआई ले जाने की बात कही और रेफरल लेटर पकड़ा दिया। वह नवाबगंज ही पहुंचे थे कि उसकी मौत हो गई। राजू तिवारी ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र भी दिया है। वहीं धीरज के रिश्तेदार मनीष ओझा ने भी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जानकारी सीएमओ को व्हाट्स एप के माध्यम से भी दी है।
सील हो चुकी है क्लीनिक
सीएमओ ने पिछले सप्ताह कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन में डॉक्टर की क्लीनिक सील करा दी थी। उनके यहां मरीजों के साथ बरती जाने वाली सावधानियां नहीं बरती जा रही थीं।
बहनों का रो-रोकर हाल था खराब, मां गश खाकर गिरी
बिना इलाज के जान गंवाने वाले धीरज की दो बहनों का हाल खराब है। रो-रोकर वह कहती रहीं कि राखी किसे बांधेंगी। वहीं उसकी मां बेटे का शव देखकर कई बार गश खाकर गिरी। जब होश आता बेटे के शव से लिपटकर दहाड़े मार कर रो पड़तीं। उनके रिश्तेदार मनीष ओझा ने बताया कि भाभी घर पहुंचीं तो बोलीं, घर में बेटे की समाधि बनाएंगी, ताकि वह उनके साथ ही रहे। वहां का दृश्य देखकर लोगों की आंखें नम हो रही थीं।