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कोरोना के चलते नहीं बन पा रहीं सड़कें

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जिले की बड़ी विकास परियोजनाओं पर कोविड -19 के संक्रमण की छाया पड़ने लगी है। रिंग रोड परियोजना के अलावा फाफामऊ सिक्स लेन पुल जैसी परियोजनाओं को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। ऐसी बड़ी परियोजनाओं पर सर्वे व भूमि अधिग्रहण का काम पूरी तरह रोक दिया गया है। अन्य बड़ी परियोजनाओं में भी ठहराव की आशंका है। कोरोना संक्रमण से महात्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं पर असर पड़ने लगा है। हाल में ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की दिल्ली में हुई भूमि अधिग्रहण कमेटी की बैठक के बाद रिंग रोड परियोजना समेत कई बड़े प्रोजेक्ट पर संकट की छाया मंडराने लगी है। प्राधिकरण से जुड़े अफसरों ने बताया कि रिंग रोड की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर चर्चा नहीं हुई।
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ऐसे में इस परियोजना के फिर ठंडे बस्ते में जाने की आशंका है। आठ महीना पहले इस परियोजना को केंद्र की प्राथमिकता सूची से बाहर निकाले जाने के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने केंद्रीय सड़क-परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर इसकी उपयोगिता बताई थी। तब नए सिरे से सर्वे शुरू हुआ था, लेकिन अब फिर से इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता बंद होने लगा है। एनलाइनमेंट के अनुसार कौड़िहार से सहसो तक इनर रिंग रोड बनाई जानी है। इसे शहर से कटे गंगा-यमुना के कछारी इलाके से होकर कौड़िहार के पास सलहा से पुराने एनएच-2 से होकर दांदूपुर से निकाला जाना प्रस्तावित है। इसके बाद महुआरी और सरस्वती हाईटेक सिटी के बीच से होकर अंदावा होते हुए इसे सहसो के पास मिलाने की योजना तैयार की गई जा चुकी है।
करीब 68 किमी लंबी इस फोर लेन इनर रिंग रोड के किनारे आठ नए टाउनशिप बसाने की भी परिकल्पना की गई है। इस इनर रिंग रोड पर गंगा -यमुना पर तीन नए पुल और सात आरओबी भी प्रस्तावित हैं। 41,000 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रयागराज -मेरठ गंगा एक्सप्रेस वे पर भी कोविड-19 का ग्रहण लग सकता है। 1050 किमी लंबे इस एक्सप्रेस-वे को शहर से 23 किमी दूर सोरांव से होकर प्रतापगढ़, रायबरेली होते हुए मेरठ से जोड़ना था। फाफामऊ सिक्स लेन पुल पर भी कोविड-19 की वजह से आई आर्थिक मंदी की छाया पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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भूमि अधिग्रहण कमेटी की हाल में ही बैठक हुई, लेकिन रिंग रोड और ऐसी अन्य बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर कोई जिक्र नहीं किया गया। भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया तब तक अबआगे नहीं बढ़ाई जाएगी, तबतक की मंत्रालय की ओर से हरी झंडी नहीं मिल जाती। इस प्रोजेक्ट पर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। एके राय, परियोजना निदेशक, एनएचआई।
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