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डीएसपी जिया उल हक हत्याकांड : राजाभैया के खिलाफ जेल से लिखी गई चिट्ठी बनी बुनियाद, भूमिका की जांच करेगी सीबीआई

Fri, 29 Sep 2023 01:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

चिट्ठी में दावा किया गया कि जांच कर रही सीबीआई के लिए राजा के समर्थक शराब और मीट की व्यवस्था करते हैं, हर जरूरी सुविधाएं देते हैं। इन लोगों को पूछताछ के नाम पर सीबीआई दिनभर बैठाए रहती है और फिर शाम को घर भेज देती है।
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रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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वर्ष 2016 में डीएसपी हत्याकांड के आरोपी नन्हें यादव के बेटे पवन ने जेल से ही परवीन को 3 पन्ने की चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में उसने दावा किया था कि जियाउल हक की हत्या राजा भैया के पुराने मैनेजर और शूटर नन्हें सिंह ने की। जिस वक्त जियाउल हक को गोली मारी गई, उस वक्त वह खड़े थे, इसके बाद उन्हें सड़क पर लिटा दिया गया।

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यह हत्या राजा के इशारे पर हुई थी। चिट्ठी में दावा किया गया कि जांच कर रही सीबीआई के लिए राजा के समर्थक शराब और मीट की व्यवस्था करते हैं, हर जरूरी सुविधाएं देते हैं। इन लोगों को पूछताछ के नाम पर सीबीआई दिनभर बैठाए रहती है और फिर शाम को घर भेज देती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को आदेश दिया कि सीबीआई राजा भैया से जुड़े तथ्यों की फिर से जांच करे। 90 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।

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जांच रिपोर्ट को परवीन ने दी थी चुनौती

परवीन जांच से संतुष्ट नहीं हुई। वह हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देती हैं। वहां जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने राजा भैया को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीबीआई ने उनसे जुड़े तथ्यों पर ठीक से जांच नहीं की। साथ ही पुलिसवालों पर भी सवाल किया कि जियाउल हक को अकेला छोड़कर कैसे चले गए। किसी और पुलिसवाले को कोई चोट क्यों नहीं आई।

इस चिट्ठी के मिलने के बाद परवीन ने इसे आधार बनाया और जांच की मांग की। परवीन एक और आरोप लगाती हैं। वह कहती हैं कि मेरे पति अवैध खनन की भी जांच कर रहे थे। जिसमें राजा के लोगों के नाम शामिल थे। परवीन कोर्ट गईं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा- परवीन अफवाहों पर बात कर रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मान्यता दे दी।

यह सब दिसंबर, 2022 में हुआ। राजा भैया इस वक्त विधायक हैं। इस मामले में उनके साथ आरोपी बनाए गए गुलशन यादव अब उनके साथ नहीं हैं। अब उनके प्रतिद्वंदी बन चुके हैं। बाकी के सारे आरोपी जेल में बंद हैं। अब देखना होगा कि 90 दिन बाद इस मामले में सीबीआई जो रिपोर्ट पेश करेगी, उसमें क्या होगा।
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