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प्रयागराज ड्रग फैक्टरी : काली कमाई के लिए युवा निशाने पर, आसपास के जिलों में तलाशा जा रहा नेटवर्क

Sat, 05 Sep 2026 06:00 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मांडा (प्रयागराज)

सार

प्रयागराज प्रतियोगी छात्रों का गढ़ है। आशंका है कि नशे के सौदागरों के निशाने पर युवा हैं। एक बार इस खतरनाक नशे की लत लगने के बाद लोग इससे उबर नहीं पाते। धीरे-धीरे इसकी चेन बनती जाती है।
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मांडा में चल रही थी ड्रग की फैक्टरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रयागराज प्रतियोगी छात्रों का गढ़ है। आशंका है कि नशे के सौदागरों के निशाने पर युवा हैं। एक बार इस खतरनाक नशे की लत लगने के बाद लोग इससे उबर नहीं पाते। धीरे-धीरे इसकी चेन बनती जाती है। पंजाब के युवा इस जानलेवा लत के जीते-जागते उदाहरण हैं। प्रयागराज के मांडा में एमडी ड्रग की फैक्टरी मिलना काली कमाई के लिए युवा नशों में जहर घोलने की बड़ी साजिश माना जा रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने युवाओं को इस लत से बचाने की बड़ी चुनौती है। पुलिस नशे की सप्लाई का नेटवर्क खंगालने में जुटी है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि एमडी आसपास के किन-किन जिलों में भेजी जा रही थी। हाल में प्रतापगढ़ में एमडी बरामद होने के बाद पुलिस इस एंगल की भी तफ्तीश कर रही है। सप्लाई हो रही थी तो ऑपरेट कौन करता था, खरीदार कौन थे?

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गांजा और स्मैक की सबसे ज्यादा बरामदगी

प्रयागराज में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में अभी तक गांजा और स्मैक की बरामदगी लगातार सामने आती रही है। गांजा और स्मैक की बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। जून 2026 में एएनटीएफ और एयरपोर्ट पुलिस की संयुक्त टीम ने 700 ग्राम स्मैक बरामद की थी। सितंबर 2025 में 102 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। जून 2026 में प्रयागराज एसटीएफ की फील्ड यूनिट ने 439 किलोग्राम गांजा पकड़ा था। अब एमडी की फैक्टरी पकड़े जाने के बाद नशे के कारोबार का दायरा और बड़ा होने की आशंका है।

निगरानी के लिए बैठता था मुखबिर, किसी को पास जाने की नहीं थी इजाजत

जंगल-पहाड़ के बीच आबादी से दूर फूलों की खेती की आड़ में चल रही अवैध ड्रग फैक्टरी की जांच तेज हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आसपास के चरवाहों ने बताया कि शेड का दरवाजा दिन में बंद रखा जाता था। एक व्यक्ति बतौर मुखबिर शेड से करीब सौ मीटर दूर छप्पर और बोर के पास बैठकर आने-जाने वालों पर नजर रखता था। किसी व्यक्ति के शेड की ओर जाते दिखाई देने पर उसे नजदीक नहीं जाने दिया जाता था।

शेड के भीतर वाटर प्यूरीफायर भी लगा मिला। चरवाहों का कहना है कि उन्हें बोतल में आरओ का पानी दिया जाता था। आसपास खाने के पैकेट और बर्तन भी मिले हैं। इससे वहां रहने वाले लोगों के लिए बाहर से खाना मंगाए जाने की आशंका जताई जा रही है।शुक्रवार सुबह एसीपी मेजा बृजेश पाठक और एसओ मांडा कुलदीप शर्मा ने सीज किए गए कारखाने का निरीक्षण किया। शेड की बनावट, आसपास के इलाके और वहां मौजूद सामान की जानकारी ली। साथ ही भूमि स्वामी समेत आसपास के लोगों से पूछताछ कर कारखाने से जुड़ी गतिविधियों के बारे में सूचनाएं जुटाईं।
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लोहे की चादर का 30 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा, 20 फीट ऊंचा शेड

निरीक्षण के दौरान शेड की बनावट सामान्य खेतों में बनाए जाने वाले अस्थायी ढांचे से अलग नजर आई। करीब 30 फीट लंबे, 40 फीट चौड़े और 20 फीट ऊंचे शेड में लोहे की चादर और एंगल लगाए गए थे। दीवार और छत के बीच रसायन या गैस की निकासी के लिए जगह छोड़ी गई थी। बारिश का पानी अंदर न पहुंचे, इसके लिए टीन की छत का बारजा भी बाहर निकाला गया था। बाहर से गतिविधियां सामान्य दिखाने के लिए आरोपियों ने सात-आठ बिस्वा जमीन पर गेंदा भी लगाया था। हालांकि देखरेख न होने के कारण अब वहां घास-फूस उग आई है।

स्थानीय कड़ियों की तलाश में जुटी पुलिस

जमीन मालिक शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, उन्हें खेत में चल रही गतिविधियों की वास्तविक जानकारी नहीं थी। 31 अगस्त की सुबह मुंबई पुलिस के दरोगा तावड़े ने फोन कर उन्हें खेत पर बुलाया। वहां पहुंचने पर पुलिस ने पहली बार बताया कि खेत में एमडी ड्रग की अवैध फैक्टरी चल रही है। इसके बाद गेट पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया। संबंधित प्रपत्रों पर भूमि स्वामी के हस्ताक्षर कराए गए।

मौके का निरीक्षण किया गया है। कारखाने को मुंबई पुलिस ने सीज किया है। फूलों की खेती के लिए जमीन को लीज पर लिया गया था। शेड के निर्माण फूलों के भंडारण और मजदूरों के रहने के लिए बनाया गया है, मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। - बृजेश पाठक, एसीपी मांडा
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