देश की सर्वमान्य चार पीठों में से एक ज्योतिष्पीठ पर विवाद के बीच शनिवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगदगुरु वासुदेवानंद पर तीखा पलटवार किया। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि वासुदेवानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बताकर सनातन धर्म को मानने वाली जनता को गुमराह कर रहे हैं। इसके लिए उनको सनातन परंपरा को मानने वालों से माफी मांगनी चाहिए।
ज्योतिष्पीठ के मठ संचालन का प्रभार शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद को सौंपने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद स्वामी वासुदेवानंद के प्रवक्ता की ओर से 420 का मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दिए जाने पर शंकराचार्य स्वरूपानंद ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में इस प्रकरण पर अपनी बात रखी।
Shankaracharya Swaroopanand
शंकराचार्य ने स्वीकार किया कि उन्होंने बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने पर अपने प्रतिनिधि के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को वहां भेजा था। इसके बाद त्रोटकाचार्य गुफा स्थित ज्योर्तिमठ में 64 योगिनियों की पूजा कराई थी। शंकराचार्य ने बताया कि इस मठ का निर्माण उन्होंने भूमि खरीद कर खुद कराया है। इसका सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद से कोई लेना देना नहीं है। शंकराचार्य ने बताया कि द्वारिका -शारदा और ज्योेतिष्पीठ के शंकराचार्य वह खुद हैं और इन दोनों पीठों पर अब तक उन्होंने किसी को उत्तराधिकारी या शंकराचार्य घोषित नहीं किया है।
इन दोनों पीठों का संचालन भी वह खुद ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया है, इस पर वह इतना ही कहेंगे कि अब तक इस पीठ के मुकदमों में आए किसी भी फैसले में कोर्ट ने स्वामी वासुदेवानंद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नहीं माना है। यही वजह है कि प्रयाग कुंभ, माघ मेला में भी ज्योतिर्मठ शंकराचार्य के रूप में भूमि सुविधाएं उनको दी जाती हैं, वासुदेवानंद को नहीं।