हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके ओझा ने कोर्ट को बताया कि शहर में डेंगू पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। बीमार लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने की जगह नहीं है। वहीं प्राइवेट नर्सिंग होम लोगों का शोषण कर रहे हैं। कोर्ट में उपस्थित अन्य वकीलों ने भी कहा, प्राइवेट नर्सिंग होम डेंगू के इलाज के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं, जो एक गरीब के लिए नामुमकिन है।
कोर्ट में उपस्थित डीएम प्रयागराज ने कहा, हमारी पूरी कोशिश है कि हम अधिक से अधिक फॉगिंग कराएं और लोगों को जोड़ें ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके। नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि एक-दो दिन में एंटी लार्वा मशीन भी उपलब्ध हो जाएगी, जिससे तत्काल लाभ लिया जा सकेगा। कोर्ट इस जनहित याचिका पर अब नौ नवंबर को सुनवाई करेगी।
बता दें, चकबंदी अधिकारी को डेंगू नियंत्रण के लिए बने कंट्रोल रूम का इंचार्ज बनाने पर कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था, अब चकबंदी अधिकारी डॉक्टरों का भी काम करेंगे। कोर्ट ने कहा, कि नगर को साफ सुथरा रखना निगम की ड्यूटी है। टेस्टिंग नहीं प्रिवेंटिव उपाय चाहिए। डेंगू से कई वकीलों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों वकील और उनके परिवार के लोग बीमार हैं।