कोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एनर्जी व प्रबंध निदेशक पॉवर कॉरपोरेशन को प्रेषित करने का भी महानिबंधक को निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने पुत्तन, जगदीश प्रसाद, सतीश केसरवानी तथा ब्रह्मदीन की याचिकाओं पर दिया है। याचिकाएं विभिन्न विद्युत वितरण खंडों की हैं।
एक याची प्रतिमाह बिल जमा कर रहा था। जनवरी 2017 से नवंबर 2021 तक का बकाया 31 लाख 47 हजार 731 रुपये बकाये की वसूली नोटिस दिया गया। एक याची ने ट्यूबवेल कनेक्शन की अर्जी दी। 17,145 रुपये जमा किया लेकिन उसे न तो कनेक्शन दिया गया और न ही पोल लगाया गया। उसी तारीख 26 फरवरी 2008 को चार लाख 83 हजार, 103 रुपये की वसूली नोटिस जारी कर दिया गया।
एक याची का कनेक्शन ही काट दिया गया। 25 फरवरी 2003 को स्थायी विच्छेदन कर दिया गया। 9444 रुपये का बकाया था. जिसका भुगतान किया जाना था। 19 अगस्त 21 को चार लाख, एक हजार, 278 रुपये की वसूली नोटिस दी गई। तहसीलदार सदर मिर्जापुर की सख्ती पर 82 हजार जमा कराया। इसके बाद चार लाख, 95 हजार 951 रुपये की वसूली नोटिस दी गई। उसे हवालात में भी बंद किया गया।
एक याची को 11 जुलाई 14 को कनेक्शन दिया गया। 16 जनवरी 19 को मीटर भी लग गया और उसी तारीख पर एक लाख, 59 हजार 598 रुपये का वसूली नोटिस पकड़ा दिया गया। विभाग ने गलती मानी। कहा, सही बिल 61191 ही है। इस पर कोर्ट ने फर्जी बिल बनाने वाले अधिकारियों पर एक्शन लेने का निर्देश दिया। कहा, जो विधि विरुद्ध कार्य कर रहे, उन्हें भुगतना ही पड़ेगा। कोई भी लोक संस्था मनमानी नहीं कर सकती।