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Diwali 2020: 499 साल बाद दिवाली पर आर्थिक समृद्धि का दुर्लभ योग

Wed, 11 Nov 2020 12:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  1. धनतेरस पूजा मुहूर्त
  • 12 नवंबर: खरीददारी का मुहूर्त रात 9:30 बजे के बाद। 
  • 13 नवंबर: प्रदोषकाल में 5:17 बजे से रात 7:08 बजे तक महालक्ष्मी और कुबेर पूजा के साथ यम दीपदान।  
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ग्रह नक्षत्र - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस बार दिवाली पर धन-धान्य से खजाना भरने और आर्थिक समृद्धि दिलाने वाले ग्रहों की दशा अनुकूल रहने से दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार 14 नवंबर शनिवार को दिवाली है और उस दिन स्वग्रही शनि आर्थिक समृद्धि दिलाने वाले ग्रह गुरु के साथ जुगलबंदी करता रहेगा। प्रयागराज के ज्योतिषियों के मुताबिक 499 साल बाद ग्रहों का ऐसा दुलर्भ योग इस दिवाली पर बन रहा है। इससे पहले वर्ष 1521 की दिवाली पर ग्रहों की ऐसी की अनुकूल स्थिति बनी थी।

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ग्रह नक्षत्र
ज्योतिष के मुताबिक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले ग्रह गुरु और शनि हैं। ऐसे में इस वर्ष दीपावली पर धन संबंधी कार्यों में बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। इसलिए कि ये दोनों ग्रह इस बार दिवाली पर अपनी राशि में मौजूद रहेंगे। अमावस्या तिथि पर दीपावली में गुरु ग्रह अपनी राशि धनु में और शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे। वहीं, शुक्र कन्या राशि में नीच का रहेगा।

ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक इन तीनों ग्रहों का यह दुर्लभ योग इससे पहले वर्ष 1521 में नौ नवंबर को आया था। इसी दिन उस वर्ष दीपोत्सव मनाया गया था। गुरु और शनि ग्रह आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले माने जाते हैं। इसलिए इस बार की दिवाली पर महालक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति के योग हैं।
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नौ ग्रह

महालक्ष्मी इस धनतेरस पर दो दिन करेंगी धनवर्षा

इस बार धन तेरस दो दिन मनाई जाएगी। 12 नवंबर को त्रयोदशी रात 9:30 बजे आरंभ होगी। ऐसे में प्रदोषकाल नहीं मिलेगा। लेकिन, खरीदारी के योग हैं। जबकि 13 नवंबर की शाम5:59 बजे तक है। ऐसे में धन त्रयोदशी की पूजा बृहस्पतिवार को ही की जाएगी। लेकिन खरीदारी के दोनों दिन योग हैं। बृहस्पतिवार को दिन भर त्रयोदशी होने से धनतेरस पर धन कुबेर संग लक्ष्मी की पूजा होगी। इस लिहाज से इस बार धन तेरस पर दो दिन धनवर्षा के योग हैं। परंपरा के मुताबिक धनतेरस पर नए सामानों खासतौर से सोने, चांदी की खरीद शुभ मानी जाती है।

13 की शाम को जलाएं यम की दीया

यम द्वितीया बृहस्पतिवार को ही मनाई जाएगी। ऐसे में 13 नवबंर की शाम अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम के नाम दीप जलाए जाएंगे। इस दिन यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, हनुमान, कुल देवता व पितरों का भी श्रद्धा पूर्वक पूजना चाहिए।
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