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जिला-मंडल प्रयागराज, शहर अब भी इलाहाबाद

Fri, 07 Dec 2018 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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फाइल फोटो
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इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सभी पक्षों की जिरह सुननेे के बाद बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी सहित कई संगठनों की ओर से याचिकाएं दाखिल कर नाम बदलने की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिला और मंडल का नाम तो प्रयागराज हो गया है, लेकिन शहर इलाहाबाद ही है। नगर निगम ने शासन को नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर विचार हो रहा है।
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याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन ने कहा कि राजस्व संहिता की धारा 6(2) के तहत किसी जिले का नाम बदलने से पहले सार्वजनिक सूचना (पब्लिक नोटिस) का प्रकाशन किया जाना चाहिए। इसके बाद इस पर आई आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद ही नाम परिवर्तन हो सकता है। आपत्तियों का निस्तारण एक कमेटी के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन सरकार करती है। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नाम बदलने की अधिसूचना रद्द करने की मांग की गई।

प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि धारा 6(2) का पालन जिले का क्षेत्रफल बदलने में किया जाता है। कोर्ट ने जानना चाहा कि जिला और शहर अलग-अलग है। कानून में सरकार को नामकरण की शक्ति है, मगर क्या कोई ऐसा कानून भी है, जिसमें पुनर्नामकरण की शक्ति भी दी गई हो। मनीष गोयल का कहना था कि मंडल और जिले का नाम बदल गया है। शहर का नाम बदलने के लिए नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर नियमानुसार विचार हो रहा है। इस पर कोर्ट का कहना था कि जिला और मंडल प्रयागराज हो गए हैं, मगर शहर अब भी इलाहाबाद है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश नारायण शर्मा, एसएफए नकवी, विजय चंद्र श्रीवास्तव, साहिद अली सिद्दीकी आदि ने पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित कर लिया है।
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