नामांकन के बाद से जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर शह और मात का खेल तेज हो गया है। संख्या बल जुटाने के गणित में जुटी भाजपा और सपा में क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। क्रॉस वोटिंग की संभावना को देखते हुए दोनों दलों के दिग्गज रणनीति बनाने में जुट गए हैं। दोनों पार्टियों के नेता दो-तीन क्रॉस वोटिंग कराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
26 सदस्यीय जिला पंचायत में सत्ताधारी भाजपा के चार व सपा के पांच सदस्य निर्वाचित हुए हैं। जबकि, बहुमत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 14 सदस्यों की जरूरत होगी। ऐसे में सबसे ज्यादा निर्वाचित निर्दल सदस्यों पर दोनों दलों के उम्मीदवारों की निगाहें हैं। खास बात यह है कि दोनों दल अपने-अपने पाले में 15-15 सदस्य होने के साथ ही खुद की जीत का दावा कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी दोनों दलों को क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। रणनीतिकारों के अनुसार यदि कुछ सदस्य अनुपस्थित हो गए या फिर क्रॉस वोटिंग की गई तो दूसरी पार्टी के लिए जीत की राह आसान हो जाएगी।
सूत्रों के अनुसार दोनों दलों को दो से तीन सदस्यों के अनुपस्थित होने अथवा क्रॉस वोटिंग का भय है। इसे लेकर दोनों दलों के दिग्गज रणनीति बनाने में जुट गए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष अनीता त्रिपाठी का दावा है कि इस समय पार्टी के साथ 15 सदस्य हैं। ऐसे में पार्टी प्रत्याशी की विजय सुनिश्चित है। चुनाव में जीत की रणनीति तैयार कर ली गई है। वहीं सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव भी 15 सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया तो पार्टी प्रत्याशी का जीतना तय है।