दिसंबर में दिया था आदेश, जनवरी में शुरु हुई जांच
महंत की मौत के बाद अजय पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे। शिकायत शासन तक पहुंची तो गृह विभाग की ओर से दिसंबर 2022 में जांच के आदेश दिए गए। जनवरी 2023 में भ्रष्टाचार निवारण संगठन मुख्यालय से मामले की जांच इंस्पेक्टर ठाकुरदास को सौंपी गई। जिसमें आरोपी दीवान प्रारंभिक रूप से दोषी पाया गया।
शासन के आदेश पर हुई जांच में पाया गया कि कुल ज्ञात वैध स्रोतों से आरोपी दीवान ने निर्धारित अवधि में 95.79 लाख रुपये की आय अर्जित की। जबकि इस अवधि में उसने कुल 1.22 करोड़ रुपये खर्च किए। इस तरह उसने आय से 26.78 लाख रुपये अधिक खर्च किए। इस संबंध में जवाब मांगा गया लेकिन वह संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। इस आधार पर पहले कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण संगठन के थाने में ट्रांसफर कर दिया गया।