उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रही हैं। इस दौरान उन्होंने विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन कुछ भर्तियां तकनीकी कारणों से फंस गई हैं। अभ्यर्थी परेशान हैं कि अब आगे क्या होगा। डॉ. वंदना शर्मा के ही कार्यकाल में पिछले दिनों प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जांच कराई गई और इस दौरान 27 मामले संदिग्ध पाए गए।
मामले में अब तक दो महिला शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है। हालांकि असिस्टेंट प्रोफेसर की दो बड़ी भर्तियां तकनीकी कारणों से फंसी हुईं हैं। इनमें विज्ञापन संख्या 47 के तहत समाजशास्त्र के 273 पद और प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पड़े असिस्टेंट प्रोफेसर के 3900 पद शामिल हैं। समाजशास्त्र के चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग भी कराई जा चुकी है।
जबकि, 3900 शिक्षक भर्ती में क्षैतिज आरक्षण को लेकर पेच फंसा हुआ है। दोनों ही मामलों में निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है।
उच्च शिक्षा निदेशालय से संबंधित मामलों की फाइलें काफी पहले शासन को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन शासन में मामला अटका हुआ है। इसके अलावा निदेशालय में पटल परिवर्तन भी होना था,ख् लेकिन यह काम भी अटका हुआ है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि आसिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र की भर्ती और असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पड़े 3900 पदों पर भर्ती से संबंधित क्षैतिज आरक्षण के मसले पर शासन से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है।