283.63 करोड़ रुपये की योजना के लिए चाहिए 325.40 करोड़ रुपये की जमीन
परियोजना की लागत से अधिक चुकता करनी होगी भूमि की कीमत,सीएम के साथ बैठक में भी नहीं निकल सका हल
प्रयागराज। संगमनगरी में सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए 283.63 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित डिजिटल कुंभ म्यूजियम योजना के लिए भूमि हस्तांतरण में पेच फंस गया है। जितने बजट की यह परियोजना है, उससे अधिक धनराशि जमीन के लिए अदा करनी होगी। पर्यटन विभाग ने भूमि हस्तांतरण के लिए शासन को पत्र भी लिखा है और हाल में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बैठक भी हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इससे एक बारगी पर्यटन विभाग के माथे पर बल पड़ गए हैं।
कंप्यूटर एवं सूचना प्रोद्यौगिकी के माध्यम से कुंभ के जरिए देश की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों के डेटा को डिजिटलल फार्मेट में संरक्षित करने की महात्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। इसके तहत प्रयाराज आने वाले तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के समक्ष सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल फार्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा। नैनी में प्रस्तावित इस डिजिटल कुंभ योजना पर पौने तीन अरब रुपये से अधिक खर्च का प्रावधान किया गया है। कुंभ पर केंद्रित यह पहला डिजिटल म्यूजियम होगा, जिसमें महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा कला-संस्कृति और संगम के वैज्ञानिक तथ्यों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस म्यूजियम के लिए 25.929 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। इसके लिए नैनी में प्रस्तावित 8.932 हेक्टेयर पीडीए की भूमि की लागत 138.44 करोड़ रुपये आंकी गई है। जबकि नगर निगम की 16.926 हेक्टेयर भूमि की कीमत 186.96 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस तरह म्यूजियम की भूमि के हस्तांतरण से पहले पीडीए व नगर निगम को 325.40 करोड़ रुपये अदा करने होंगे। इसलिए की निगम और पीडीए ने बोर्ड की बैठकों में भूमि का मूल्यांकन करा कर निर्धारित कीमतों सहित प्रस्ताव पारित किया है। फिलहाल योजना की लागत से बड़ी भूमि की धनराशि को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। हाल में ही सीएम के साथ पर्यटन विभाग की हुई बैठक में भूमि हस्तांतरण पर चर्चा हुई, लेकिन हल नहीं निकल सका। कहा जा रहा है कि सरकार को किसी न किसी मद से इस रकम की भरपाई करनी होगी, वरना भूमि हस्तांतरण आसान नहीं होगा।
भूमि उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इसके लिए यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि पीडीए अगर मुफ्त में भूमि उपलब्ध करा दे तो डिजिटल कुंभ म्यूजियम निर्माण के बाद रखरखाव व संचालन के लिए उसे ही हस्तांतरित कर दिया जाएगा। दिनेश कुमार, उप निदेशक- पर्यटन।
तीन तल में होगा डिजिटल म्यूजियम
प्रयागराज। डिजिटल कुंभ म्यूजियम तीन तल में निर्मित होगा। भूतल पर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व साहित्यिक विभूतियों की मोम से निर्मित मूर्तियां स्थापित होंगी। प्रथम त पर प्रयागराज की धरोहरों के अलावा सांस्कृतिक महत्व के दस्तावेजों, कृतियों के अलावा वास्तुकला को प्रदर्शित किया जाएगा। द्वितीय तल पर कुंभ की धार्मिकता, पौराणिकता, ऐतिहासिकता व वैज्ञानिकता से जुड़े तथ्यों व छायाचित्रों को डिजिटल फार्मेट में संजोया जाएगा।