ठगी में इस्तेमाल किए चालू खाते
जिन तीन खातों का इस्तेमाल इस घटना में किया गया, वह चालू हैं। यह किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि फर्म के नाम पर खोले गए थे। इनमें से पहला खाता, जो इंडसइंड बैंक में खुलवाया गया, उसे फ्लाई बाई एजेंसी के नाम से खुलवाया गया था। इसके अलावा दूसरा खाता एसबीआई में महिमा रोड लाइंस के नाम से खोला गया। इसी तरह तीसरा खाता, जो एसबीआई का था, ग्रामीण दिव्यांगजन कल्याण संस्थान के नाम से खुलवाया गया था। चालू खाते के इस्तेमाल के बाबत यह आशंका जताई जा रही है कि इसमें बचत खाते की अपेक्षा ज्यादा रकम का लेनदेन आसानी से किया जा सकता है।
गिरोह के दो राज्यों से जुड़े तार
पुख्ता सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह बात तो तय हो गई है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले गिरोह के तार कम से कम दो राज्यों से तो जुड़े ही हैं। इनमें से एक महाराष्ट्र, जबकि दूसरा उड़ीसा है। दरअसल, ठगी में जिन खातों का इस्तेमाल हुआ, वह इन्हीं राज्यों में स्थित बैंकों में खुलवाए गए। जैसे एसबीआई के जिस खाते में 13.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए, वह उड़ीसा के जनपद जजपुर स्थित बिंझारपुर शाखा का है।
इसी तरह एसबीआई के ही एक अन्य खाते, जिसमें पीड़ित से 16.50 लाख रुपये जमा कराए गए, वह महाराष्ट्र के लातूर जनपद स्थित चाकूर गांव का है। इसी तरह 68 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के जिस खाते में डलवाए गए, वह महाराष्ट्र के ही नासिक शाखा से संबंधित है।