मैनपुरी में 16 वर्षीय स्कूली छात्रा की कॉलेज परिसर में फांसी लगाने से मौत मामले में नई एसआईटी गठित कर दी गई है । टीम में अनुभवी और दक्ष अधिकारियों को शामिल किया गया है। हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को फिर से हाज़िर हुए डीजीपी ने कोर्ट को इसकी जानकारी दी। यह भी बताया कि जांच में लापरवाही बरतने पर एएसपी, डिप्टी एसपी व आईओ को निलंबित कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने एसआईटी को 6 सप्ताह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है ।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले में जांच की रिपोर्ट से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन व कोर्ट को भी अवगत कराया जाए। लड़की के माता-पिता को सुरक्षा मुहैया कराने का भी कोर्ट ने निर्देश दिया है। कोर्ट को सरकार की तरफ से बताया गया कि एडीजी कानून व्यवस्था की निगरानी में जांच पूरी की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति जिला जज मैनपुरी को भी भेजी जाए, जिसे वहां के सभी न्यायिक अधिकारियों को सर्कुलेट किया जाए।
दुष्कर्म मामलों में दो माह पूरी हो जांच
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह दुष्कर्म के मामले में दो माह में जांच पूरी करने का सर्कुलर जारी करें और विवेचना करने वाली पुलिस को प्रशिक्षण दिया जाए। डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि मैनपुरी के तत्कालीन एसपी को सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान रोक दिया गया है। उन्हें केवल प्रोविजनल पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने डीजीपी समेत सभी उपस्थित पुलिस अधिकारियों की अगली सुनवाई पर हाजिरी माफ कर दी है।
सबको अपने कर्मों का फल यही भुगतना होता है
सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकारी जब कोर्ट रूम से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे तभी कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि स्वर्ग कहीं और नहीं है। सबको अपने कर्मों का फल यहीं भुगतान पड़ता है। कोर्ट ने डीजीपी से यह भी कहा कि पुलिस को जांच के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है। अधिकांश जांच कांस्टेबल करते हैं । दरोगा कभी-कभी जाता है।
डीजीपी को कोर्ट ने जानकारी के साथ बुलाया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी में दो साल पहले जवाहर नवोदय विद्यालय में एक नाबालिग छात्रा की फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले में सवालों का जवाब न दे पाने पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी मुकुल गोयल को रोक लिया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने डीजीपी के अलावा आईजी मोहित अग्रवाल व इस मामले में गठित एसआईटी के सदस्य पुलिस अधिकारियों को भी बृहस्पतिवार को फिर हाजिर होने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि मामले में न्यायालय द्वारा दिखाई गई गंभीरता और दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ निर्देश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बल्कि मामले की जानकारी डीजीपी को नहीं दी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी और एसआईटी के सदस्य जांच करने में पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट करने के लिए अदालत में उपस्थित रहेंगे और आगे यह भी बताएंगे कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मैनपुरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लगभग छह महीने पहले उनकी सेवानिवृत्ति से पहले क्यों नहीं पूरी की जा सकी।