Prayagraj News : देवोत्थान एकादशी पर संगम तट पर दीपदान किया गया।
- फोटो : प्रयागराज
महिलाओं ने सुबह गन्ने से सूप पीटकर दरिद्र नारायण से मुक्ति की कामना की। संगम के अलावा यमुना के बलुआ घाट पर तो कहीं तिल रखने की भी जगह नहीं बची। खचाखच भीड़ यमुना तट पर भगवान को जगाने के लिए उमड़ती रही। वहां, स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर श्रद्धालुओं ने सर्व मंगल की कामना की।
भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई। सोमवार से हर तरफ शहनाई की गूंज सुनाई देने लगेगी। महीनों सेे इस घड़ी के आने का इंतजार करने वाले गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण, अन्नप्राशन, विवाह के अलावा नए प्रतिष्ठानों के शुभारंभ में जुट जाएंगे। भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से शयन पर चले गए थे। इससे मांगलिक कार्य अभी तक बंद थे।
Prayagraj News : देवोत्थान एकादशी पर संगम तट पर किया गया दीपदान।
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Prayagraj News : देवोत्थान एकादशी पर संगम तट पर किया गया दीपदान।
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देवोत्थान एकादशी पर दीपमालाओं से जगमगाया कालिंदी का तट
देवोत्थान एकादशी पर रविवार की शाम कालिंदी तट लाखों दीपों की लड़ियों से जगमगा उठा। सिद्ध पीठ बाबा मौजगिरि घाट पर सवा लाख दीपों की कतारें एक साथ जलीं तो एक बारगी लगा जैसे धरा पर स्वर्णिम आभा उतर आई हो। इस दौरान संतों-भक्तों ने दीपदान कर भगवान विष्णु की आराधना की और लोक मंगल की कामना की गई।
दत्तात्रेय सेवा समिति की ओर से देवोत्थान एकादशी पर रविवार की शाम दीप महायज्ञ में हिस्सा लेने के लिए संतों-भक्तों की भीड़ लगी रही। इस दौरान सर्वमंगल के लिए अनुष्ठान किए गए। यमुना नदी के तट पर बाबा मौजगिरी घाट पर दीपदान के इस महायज्ञ में सवा लाख दीप यमुना नदी को अर्पित किए गए। इस अवसर पर साधु-संतों देश में समाज में खुशहाली की कामना की। सनातन परंपरा में कार्तिक मास में कालिंदी यानी यमुना नदी में दीपदान का विशेष महत्व है। देवोत्थान की इस बेला को कालिंदी पूजा और दीपदान के लिए पुण्यकारी माना गया है। इसी तरह कार्तिक मास केअनुष्ठानों के क्रम में गऊघाट स्थित मौनी बाबा मंदिर परिसर में दीपदान किया गया।