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High Court : एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए विकसित करें निगरानी तंत्र,  याची के खिलाफ दर्ज मामला रद्द

Sun, 22 Sep 2024 12:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामला संभल जिले के थानाक्षेत्र कैला देवी का है। शिकायतकर्ता ने याची के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। सरकार ने पीड़ित को 75 हजार रुपये मुआवजा दिया। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
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हाईकोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजे की लालच में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्य सरकार को निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसा प्रभावी तंत्र विकसित नहीं हो जाता, तब तक एफआईआर दर्ज करने से पहले घटना व आरोप का सत्यापन किया जाना चाहिए।

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आरोप झूठा मिले तो शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें। ताकि, हाशिये पर बैठे समाज के कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए बने कानून का दुरुपयोग रुके और वास्तविक पीड़ित की सुरक्षा व संरक्षा हो सके। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने बिहारी व दो अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

मामला संभल जिले के थानाक्षेत्र कैला देवी का है। शिकायतकर्ता ने याची के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। सरकार ने पीड़ित को 75 हजार रुपये मुआवजा दिया। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इसके बाद याची ने आपराधिक केस रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को तलब कर सरकार से लिया मुआवजा वापस करने का आदेश दिया। कहा, जिला समाज कल्याण अधिकारी, संभल के नाम डिमांड ड्राफ्ट डीएम कार्यालय में जमा कर रिपोर्ट पेश करें। ।

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साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय व असंज्ञेय दोनों आपराधिक मामलों को समझौते से समाप्त किया जा सकता है। इसलिए पक्षकारों के बीच समझौता सही है। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया।

आदेश की प्रति जिला जजों और डीजीपी को भी भेजी

कोर्ट ने आदेश की प्रति सभी जिला जजों व डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए कहा कि झूठे मामले वास्तव में हुई घटना को चोट पहुंचा रहे हैं। न्याय प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर रहे हैं। लोगों का भरोसा खत्म कर रहे हैं, जिस पर रोक लगनी चाहिए।
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