उनका मानना है कि इससे दोषियों को सजा नहीं मिल पाएगी। जबकि, इसके विपरीत महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य स्वामी अमर गिरि का कहना है कि जब उन्होंने इस घटना की लिखित तहरीर तक नहीं दी और किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज कराई तो वह मुकदमा लड़कर परेशान नहीं होना चाहते। इसी वजह से नाराज होकर महंत बलवीर गिरि ने हनुमान मंदिर की व्यवस्था की जिम्मेदारियां अमर गिरि से छीन ली हैं।
इस विवाद को दूर कराने आए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने अमर गिरि को बड़े हनुमान मंदिर मंदिर की व्यवस्था अमर गिरि को वापस करने का आश्वासन दिया और बलवीर गिरि से भी हामी भरवाई, लेकिन नतीजा अब तक सिफर ही रहा है। हालांकि ताजा हालात पर अमर गिरि ने कुछ दिन और इंतजार कर लेने और धीरे-धीरे सब ठीक हो जाने की जहां बात कही, वहीं महंत बलवीर गिरि ने प्रकरण पर संपर्क करने के बाद भी किसी तरह की टिप्पणी नहीं दी।