इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि होमगार्ड कानून के तहत कदाचार का दोषी पाए जाने पर विभागीय जांच कोई व्यवस्था नहीं है। उसे सिर्फ नोटिस देकर सेवा से बर्खास्त कर देना उचित निर्णय है। होमगार्ड का काम कानून व्यवस्था कायम रखने में पुलिस का सहयोग करना। यदि स्वयं ही अपराध करे तो उसे सेवा मे बने रहने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में जारी शासनादेश से सुनवाई का मौका देने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में आपराधिक मुकद्दमे में लिप्त होमगार्ड को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब सुनने के बाद बर्खास्त करना विधि विरुद्ध नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने सोनभद्र के हृदय नारायण यादव व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में जिला कमांडेंट होमगार्ड के 18 नवंबर 2019 के आदेश की चुनौती दी गई थी। याचियों के खिलाफ आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। जिसपर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। याचियों का कहना था कि उनके खिलाफ विभागीय जांच की जानी चाहिए थी। बिना जांच किए कारण बताओ नोटिस देकर बर्खास्त करना सही नहीं है।
सरकारी वकील का कहना था कि होमगार्ड कानून के तहत सेवा अस्थायी है। जिसे हटाने के लिए विभागीय जांच जरूरी नहीं है। याचियों के खिलाफ आपराधिक केस चल रहा है। होमगार्ड स्वयंसेवी है। यह पद सिविल पद नहीं है। और नियमों में विभागीय जांच कराने की व्यवस्था नहीं है। 21अगस्त 2012 के परिपत्र में कहा गया है कि अपराध मे लिप्त होने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। याचियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।