दिसंबर 2024 तक उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) से होकर गुजरने वाला हावड़ा-दिल्ली रूट पूरी तरह से 160 किमी की रफ्तार से ट्रेन संचालन के लिए महफूज हो जाएगा। एनसीआर का यह रेलखंड जो प्रयागराज मंडल के अधीन आता है, इसमें गाजियाबाद से पंडित दीन दयाल उपाध्याय तक दोनों ओर बांउड्रीवॉल का निर्माण हो जाएगा। कई स्थानों पर हाईवे की तर्ज पर मेटल बीम क्रैश बैरियर भी लगाए जाएंगे।
एनसीआर के प्रयागराज मंडल में चरणबद्ध तरीके से रेलट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए दीवार का निर्माण हो रहा है। कुछ स्थानों पर दीवार बनाई भी जा चुकी है। जहां दीवार नहीं है वहां मेटल बीम क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। पूरी तरह से दीवार बनाने के बाद ही एनसीआर के इस रूट पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रतिघंटा की जाएगी।
एनसीआर प्रशासन की तैयारी है कि दिसंबर 2023 तक गाजियाबाद-टूंडला रेलखंड में दीवार का निर्माण पूरा कर लिया जाए, जबकि दिसंबर 2024 तक शत प्रतिशत दीवार बना दी जाए। दरअसल, आए दिन रेलवे ट्रैक पर मवेशियों की धमाचौकड़ी की वजह से रेल संचालन बाधित होता है। ट्रैक किनारे पड़े खाने पीने के सामान के चक्कर में मवेशी ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं।
वंदे भारत समेत अन्य ट्रेनों की चपेट में कई बार मवेशी आ चुके हैं। इन्हीं घटनाओं को रोकने के लिए एनसीआर प्रशासन ने ट्रैक किनारे अब मेटल बीम क्रैश बैरियर लगाने का निर्णय लिया है। यह काम इसी वित्तीय वर्ष से शुरू हो जाएगा। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक सतीश कुमार का कहना है कि 160 की रफ्तार से ट्रेनों के संचालन के लिए पहले ट्रैक की सुरक्षा जरूरी है। सुरक्षित संचालन के लिए दीवार का निर्माण शुरू हो चुका है।