याची की ओर से वरिष्ठï अधिवक्ता अनिल तिवारी ने तर्क दिया कि जवाहर यादव हत्याकांड से उसका कोई लेना देना नहीं है। घटना की प्राथमिकी कई दिनों के बाद बहुत सलाह मशविरा के बाद दर्ज कराई गई। घटना के दौरान याची दिल्ली में था। उसे सियाशी रंजिशन फंसाया गया। जबकि प्रतिवादी की तरफ से पक्ष रख रहे अधिवक्ता अभिषेक कुमार यादव को असिस्ट कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने तर्क दिया कि घटना सिविल लाइंस इलाके की है। तीन लोग प्रत्यक्षदर्शी हैं। एके-47 से हत्या की गई और याची का नाम प्राथमिकी में दर्ज है। वह पैरोल का लगातार फायदा उठा रहा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत पर फैसला सुरक्षित कर लिया।