शिकायतकर्ता के पत्र व मंडलायुक्त की ओर से सात जून को भेजी जांच रिपोर्ट के अनुसार इन भूखंडों से संबंधित 52 वाद वर्ष 10 दिसंबर 2015 को दाखिल हुए थे। इसके अलावा आठ वाद इससे तीन दिन पहले यानी सात दिसंबर को दाखिल हुए थे। इन सभी 60 वादों को 12 दिसंबर को निस्तारित कर दिया गया। इसके विपरीत एक वाद उसी वर्ष 10 दिसंबर को दाखिल हुआ था, जिसका निस्तारण पिछले वर्ष छह नवंबर हुआ।
ज्यादातर वादों में तहसीलदार की ओर से आख्या लगाई गई है, जिसे एसडीएम ने स्वीकृति प्रदान कर दी। कई वाद में तहसीलदार की आख्या के आगे बस ओके लिख दिया गया है। वाद निस्तारण को लेकर स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया है और न ही इसके अंतिम रूप से निस्तारण संबंधी आदेश के औचित्य को ही स्पष्ट किया गया है। इन आदेशों से यह स्पष्ट भी नहीं है कि इनके निस्तारण में इतनी तत्परता क्यों दिखाई गई।
शासन की ओर से पूरे मामले की जांच के लिए कहा गया है। डीएम, एडीएम सिटी और बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी की जांच समिति यह भी देखेगी कि इन वादों का निस्तारण किन परिस्थितियों में अप्रत्याशित शीघ्रता से किया गया है। जांच समिति यह भी देखेगी कि तत्कालीन प्रशासन व्यक्तियों, भूमाफिया, बिल्डरों के बीच संबंधों को भी देखेगी, जिसकी वजह से वादों के निस्तारण में अतिशीघ्रता दिखाई गई।
रेलवे की भी करोड़ों की बेच दी गई थी जमीन
फूलपुर तहसील के अंतर्गत 2015 में एक अन्य जमीन घोटाला हुआ था। उस समय रेलवे ग्राम समाज के साथ रेलवे की जमीन भी भूमाफिया को बेच दी गई थी। उस मामले में तत्कालीन तहसील प्रशासन की मिलीभगत सामने आई थी, जिसकी अभी जांच चल रही है।
255 पेज के शिकायत पत्र में आदेशों की भी लगाई गई है प्रति
बलवान सिंह की ओर से 255 पेज का शिकायती पत्र दिया गया है। इसमें रेवेन्यू केसेज कंप्यूटराइज्ड सिस्टम पोर्टल पर अपलोड सभी 61 आदेशों की प्रति भी लगाई गई है। इस आधार पर मंडलायुक्त की ओर से जांच कराके पिछले महीने रिपोर्ट भेजी गई थी। इन्हीं आधारों पर अमर मुख्य सचिव राजव पी.गुरु प्रसाद ने डीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसके अलावा आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद की अनुमति पर उत्तर प्रदेश उप भूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्मलाल वर्मा की भी ओर से भी जांच का आदेश दिया गया है।
मंगाए गए सभी दस्तावेज
डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। तहसील से सभी आदेशों की मूल कॉपी मंगाई गई है। निबंधन कार्यालय से सभी संबंधित भूखंडों की रजिस्ट्री की मूल प्रति मंगाई गई है। इसके अलावा कलक्ट्रेट एवं तहसील में रखे गए भूखंड से संबंधित पुराने दस्तावेज भी मंगा लिए गए हैं। ताकि, यह देखा जा सके कि यह ग्राम समाज की ही जमीन है। पूरे मामले में उस दौरान तैनात एसडीएम, अफसरों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।