ये दोनों भर्ती परीक्षाएं शिक्षा सेवा चयन आयोग को करानी है, लेकिन स्थायी अध्यक्ष के इंतजार में भर्ती अटकी हुई है। वहीं, अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के सैकड़ों नए पद खाली हो गए हैं और उच्च शिक्षा निदेशालय को रिक्त पदों का अधियाचन भेजना है, लेकिन आयोग ने अब तक निदेशालय से अधियाचन नहीं मांगा। स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति न होने के कारण ऐसे ही तमाम नीतिगत फैसले अटके हुए हैं।
दूसरी ओर शासन की ओर से भर्ती परीक्षाओं के आयोजन को लेकर नई गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। ऐसे में शिक्षा सेवा चयन आयोग को भी नई गाइडलाइन के अनुरूप ही परीक्षा करानी होगी। इसके लिए आयोग को कई नीतिगत फैसले लेने होंगे। यह तभी हो सकेगा, जब आयोग के लिए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।