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UP : 43 साल पहले हुई मौत...हत्या नहीं गैर-इरादतन हत्या थी, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

Fri, 20 Oct 2023 02:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामला 43 साल पुराना प्रयागराज जिले के हंडिया थानाक्षेत्र का है। 23 मई 1980 को मृतक हिंच नारायण मिश्रा (50) की पत्नी राम अधारी देवी ने अपने देवर लख नारायण मिश्रा और दूसरे देवर राम लखन मिश्रा के दो बेटे काली प्रसाद मिश्रा (19) और शिव शंकर मिश्रा (22) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पहले पारिवारिक पंचायत में शामिल होने से इन्कार करने पर झड़प में हुई मौत को हत्या न मान कर गैर-इरादतन हत्या का मामला माना। निचली अदालत द्वारा हत्या के लिए दोषी ठहराए गए अपीलार्थी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सात वर्ष सश्रम कारावास में बदल दिया।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने उम्रकैद की सजा पाए काली प्रसाद मिश्रा और शिव शंकर मिश्रा द्वारा निचली जिला व सत्र न्यायाधीश इलाहाबाद के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है।

मामला 43 साल पुराना प्रयागराज जिले के हंडिया थानाक्षेत्र का है। 23 मई 1980 को मृतक हिंच नारायण मिश्रा (50) की पत्नी राम अधारी देवी ने अपने देवर लख नारायण मिश्रा और दूसरे देवर राम लखन मिश्रा के दो बेटे काली प्रसाद मिश्रा (19) और शिव शंकर मिश्रा (22) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। आरोप लगाया भूमि विवाद को लेकर हो रही पारिवारिक पंचायत में शामिल होने से इन्कार करने पर उनके देवर लख नारायण के इशारे पर काली प्रसाद मिश्रा और शिव शंकर मिश्रा ने उनके पति को लाठी मारी जिससे वह घायल हो कर गिर गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

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उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती

पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल कर दिया, लेकिन जिला अदालत ने कालीचरण और शिव शंकर को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि लख नारायण को दोषमुक्त कर दिया। कालीचरण और शिव शंकर ने वर्ष 1984 में उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपील लंबित रहने के दौरान शिव शंकर की मौत हो गई जबकि काली चरण ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
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परीक्षण में हत्या का मकसद नहीं हुआ स्पष्ट

43 साल पुराने मामले का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पेश मृतक की बहू ने गवाही में बताया कि कालीचरण और शिव शंकर घटना वाले दिन उसके ससुर को पंचायत के लिए बुलाने आये और बोले ‘दादा चलाे’, लेकिन उन्हाेंने जाने से मना कर दिया। जिससे नाराज दोनों ने उन पर लाठी से हमला कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अपीलार्थियों की भाषा से स्पष्ट होता है कि उनका मकसद हत्या करने का नहीं था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लाठी ग्रामीण परिवेश की पहचान है, लोग लाठी लेकर चलते है। वर्तमान घटना के हालातों ये स्पष्ट होता है कि अपीलार्थी हत्या के मकसद से लाठी ले कर मृतक को बुलाने नहीं पहुंचे थे। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली। कोर्ट ने अपीलार्थी कालीचरण मिश्रा को हत्या की जगह गैर-इरादतन हत्या के लिए दोषी माना। निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पलटते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुना दी।
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