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प्रयागराज में करोड़ों के बिल संशोधन घोटाले में लीपापोती का खेल

Fri, 26 Jun 2020 01:29 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
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फर्जी आईजी के जरिए बिजली बिलों के संशोधन की आड़ में करोड़ों रुपये का घोटाला होने की आशंका है। अब तक अकेले फूलपुर और हंडिया में 2.64 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई है। कहा जा रहा है कि जिले के सभी 20 डिवीजनों में बिलिंग रिवाइज घोटाले की जांच कराई जाए तो अरबों रुपये का खेल सामने आ सकता है।

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फिलहाल इसमें बिजली विभाग के बड़े अफसरों की गर्दन बचाने के लिए दो लिपिकों को निलंबित कर मामले की लीपापोती शुरू कर दी गई है। इस बीच प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी के बालाजी ने फ्लूएंट कंपनी के 88 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी है। मंगलवार को एमडी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की।

बिजली - फोटो : अमर उजाला
बिल रिवाइज घोटाले में आंध्र प्रदेश की साफ्टवेयर कंपनी मेसर्स फ्लूएंट ग्रिड सिस्टम लिमिटेड के आपरेटरों की भूमिका भी शक के दायरे में है। इसमें उपखंड प्रथम रीवा रोड के एसडीओ संजीव कुमार श्रीवास्तव की आईडी वाले कंप्यूटर सिस्टम से 22 बिजली बिलों को हटाने के मामले में बीते छह जून को फ्लूएंट कंपनी के प्रतिनिधि रंजीत कुमार निवासी पिंडरा सहायनपुर, कौशांबी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

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बिलों को संशोधित कराने का खेल अप्रैल 2019 में पहली बार तब सामने आया था, जब फूलपुर उपखंड के कार्यालय सहायक आशीष श्रीवास्तव की आईडी से सिकंदराबाद उपकेंद्र में लगाए गए आपरेटर अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने 11 बिलों को हटा दिया था। बिलों की वसूली की जमाबंदी के दौरान लाखों रुपये का अंतर आने पर तब आशीष ने अरविंद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए एसडीओ और एक्सईएन को इस गड़बड़ी की जानकारी दी थी।

meter - फोटो : amar ujala
मामला तब आगे बढ़ गया जब विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता आनंद कुमार पांडेय ने झूंसी, फूलपुर समेत कई इलाकों के 210 बिजली बिलों के बकाये की वसूली के लिए आरसी जारी कर दी। आरसी लेकर जब अमीन संबंधित उपभोक्ताओं के पास वसूली के लिए जाने लगे तब पता चला कि उनके बिलों को जेई, एसडीओ और लिपिकों ने रिवाइज कराया था।

उपभोक्ताओं ने जब बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दिया, तब इस मामले की जानकारी तहसीलदार को दी गई। तहसीलदार ने एसडीएम को बताया कि यह प्रकरण बिलों के बकाए का नहीं, बल्कि बिल संशोधन के नाम पर हुए घोटाले का है। एसडीएम ने जांच के बाद डीएम को भेजी रिपोर्ट में 237 बिजली बिलों की गड़बड़ी का जिक्र किया है।
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बिजली का मीटर अब होगा घर के बाहर
इसके बाद डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले की जांच करने का निर्देश दिया। एसई ने एक्सईएन दिनेश कुमार के नेतृत्व में कमेटी गठित तो कर दी, लेकिन मामले को दबाकर रखा गया था।

बिल रिवाइज करने के नाम पर अभी सिर्फ गंगापार का प्रकरण सामने आया है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। मिर्जापुर और भदोही के एसई से प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जिले भर के सभी 20 डिवीजनों में बिल रिवाइज करने के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है। हम नजर रखे हुए हैं। मामला और बड़ा हो सकता है। इस मामले में साफ्टवेयर कंपनी फ्लूएंट का भुगतान रोक दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने पर चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। के बालाजी, एमडी-पूर्वांचल विद्युतवितरण लिमिटेड। 
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