एक मुद्दे पर तथ्य छिपाकर दुबारा याचिका दाखिल करने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचियों पर पांच-पांच हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हालांकि बाद में याचीगण द्वारा माफी मांग लिए जाने पर कोर्ट ने कहा कि इस आदेश का असर याचियों के भविष्य पर नहीं पड़ेगा। इसे अयोग्यता या स्टिग्मा न समझा जाए। कोर्ट ने पूर्व में लगाई गई हर्जाने की राशि भी दस हजार से घटाकर पांच हजार रुपये कर दी है। कोर्ट ने यह राहत भविष्य को लेकर अपीलार्थियों की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए दिया है।
आलोक कुमार सिंह और चार अन्य की विशेष अपील पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचीगण ने इसी मामले को लेकर पूर्व अनुज द्विवेदी व अन्य के नाम से याचिका दाखिल की थी। जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया था।
उन्हीं में से पांच याचियों ने इस बात को छिपाकर उसी मामले पर एक अन्य पीठ के समक्ष दुबारा याचिका दाखिल कर दी। जिसे कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए 10 हजार रुपये प्रत्येक पर हर्जाना लगाते हुए खारिज कर दिया। हर्जाना राशि को अपील में चुनौती दी गई थी। दो सप्ताह में हर्जाना हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि हर्जाना जमा नहीं हुआ तो संबंधित जिलाधिकारी राजस्व वसूली प्रक्रिया में वसूल करें।